राजनीति
ईरान की होर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी, अमेरिका ने दावों को नकारा: वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल?
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:11 pm

ईरान के सैन्य मुख्यालय ने होर्मुज़ स्ट्रेट को जहाजों के लिए बंद करने का दावा किया है, जिसे अमेरिका ने सिरे से खारिज करते हुए समुद्री सुरक्षा बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है क्योंकि ईरान के 'ख़ातम अल-अंबिया' मुख्यालय ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी जहाजों के लिए बंद करने की घोषणा की है। ईरान के इस आक्रामक रुख ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता पैदा कर दी है, हालांकि अमेरिका ने ईरान के दावों को वास्तविकता से परे बताया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़े इस मुख्यालय का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और बाहरी हस्तक्षेप के विरोध में उठाया गया है।
ईरान की इस घोषणा के तुरंत बाद वाशिंगटन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और उपराष्ट्रपति कार्यालय ने एक संयुक्त संदेश में स्पष्ट किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य है और ईरान का दावा निराधार है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में 'नेविगेशन की स्वतंत्रता' सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी अवैध अवरोध का डटकर मुकाबला किया जाएगा। पेंटागन के अनुसार, क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की उपस्थिति किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए पर्याप्त है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। यह ओमान और ईरान के बीच स्थित है और खाड़ी देशों को अरब सागर से जोड़ता है। यदि यह मार्ग वास्तव में बंद होता है, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अक्सर दबाव बनाने की रणनीति के तहत ऐसी धमकियां देता रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष चिंता का विषय है। ऑस्ट्रेलिया अपनी रिफाइंड पेट्रोलियम जरूरतों के लिए काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय आयात पर निर्भर है। यदि मध्य पूर्व में तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होती है, तो सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल वृद्धि देखी जा सकती है। इसके अलावा, भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी इस मार्ग पर टिकी है क्योंकि खाड़ी देश भारत के प्राथमिक तेल आपूर्तिकर्ता हैं।
कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान का यह बयान आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर अपनी ताकत दिखाने का प्रयास हो सकता है। हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगियों की सक्रियता को देखते हुए, पूर्ण रूप से मार्ग बंद करना ईरान के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। वर्तमान में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं, और आईआरजीसी की गतिविधियों की बारीकी से निगरानी की जा रही है। ICN24 इस घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है ताकि आप तक सटीक जानकारी पहुंचती रहे।
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