राजनीति
होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान और ओमान समझौते के करीब, लेकिन तेहरान ने रखी अमेरिका से मुआवजे की कड़ी शर्त
ICN24 Newsroom 9 अग॰ 2026, 05:37 pm

ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अस्थायी मार्ग के लिए समझौते के करीब हैं, लेकिन तेहरान ने पूर्ण बहाली के लिए अमेरिका से मुआवजे की मांग की है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने संकेत दिया है कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक अस्थायी समुद्री मार्ग को लेकर ओमान के साथ चल रही बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मस्कट में मीडिया से बात करते हुए अरागची ने कहा कि दोनों पक्ष एक व्यावहारिक समाधान के 'लगभग बहुत करीब' हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह से खोलने के लिए तेहरान की शर्तें अत्यंत कठोर हैं, जिसमें सबसे प्रमुख शर्त अमेरिका द्वारा पिछले युद्धों और प्रतिबंधों के कारण हुए नुकसान का मुआवजा देना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा माना जाता है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालता है। अरागची के अनुसार, जब तक अमेरिका अपनी 'शत्रुतापूर्ण नीतियों' को नहीं बदलता और ईरान को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई नहीं करता, तब तक जलमार्ग की पूर्ण और सामान्य स्थिति की बहाली संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मुआवजा न केवल वित्तीय है, बल्कि ईरान की संप्रभुता के सम्मान से भी जुड़ा है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। भारत अपनी कच्चा तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए प्राप्त करता है। होर्मुज में तनाव बढ़ने का सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और मुद्रास्फीति पर पड़ता है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए, जो एक प्रमुख ऊर्जा निर्यातक हैं, इस जलमार्ग में अस्थिरता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और रसद (logistics) लागतों को प्रभावित करती है, जिससे सिडनी से मेलबर्न तक उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ओमान के साथ यह संभावित समझौता केवल एक अस्थायी राहत हो सकता है। तेहरान द्वारा अमेरिका से मुआवजे की मांग एक ऐसा जटिल मुद्दा है जिसे वाशिंगटन द्वारा स्वीकार किए जाने की संभावना न के बराबर है। यह स्थिति संकेत देती है कि ईरान इस जलमार्ग का उपयोग पश्चिमी देशों पर दबाव बनाने के लिए एक रणनीतिक हथियार के रूप में कर रहा है। क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से, यह भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते समुद्री सहयोग (जैसे कि क्वाड पहल) के महत्व को और भी रेखांकित करता है।
अरागची के इस बयान ने खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। जहां एक ओर अस्थायी मार्ग की खबर से तेल बाजारों में थोड़ी राहत की उम्मीद है, वहीं 'मुआवजे' की शर्त ने दीर्घकालिक समाधान पर सवालिया निशान लगा दिया है। आने वाले हफ्तों में ओमान की मध्यस्थता इस मुद्दे पर निर्णायक साबित हो सकती है, लेकिन वैश्विक व्यापार जगत की नजरें फिलहाल तेहरान और वाशिंगटन के बीच होने वाली किसी भी परोक्ष बातचीत पर टिकी हैं।
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