राजनीति
ईरान ने केश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की, 'कड़े जवाब' की दी चेतावनी
ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 03:36 pm

ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप पर हुए घातक अमेरिकी हमले की निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
तेहरान ने जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में स्थित अपने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप पर अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमले की तीखी आलोचना की है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कार्रवाई को अपनी क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन करार दिया है। इस हमले में कई लोगों के हताहत होने की खबर है, जिसके बाद ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इस 'दुस्साहस' का उचित समय पर कड़ा जवाब देगा।
ईरानी सरकार के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केश्म द्वीप पर हमला केवल ईरान पर हमला नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली कार्रवाई है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भी संकेत दिए हैं कि उनकी सेनाएं किसी भी प्रकार के सुरक्षा खतरे का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
दूसरी ओर, वाशिंगटन ने इस हमले को 'रक्षात्मक' बताते हुए तर्क दिया है कि यह कार्रवाई अमेरिकी हितों और क्षेत्र में उसके सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थी। हालांकि, इस सैन्य टकराव ने मध्य पूर्व में पहले से ही जारी तनाव को और अधिक गहरा कर दिया है। रणनीतिकारों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ना तय है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय बना हुआ है। खाड़ी क्षेत्र में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं, और वहां किसी भी प्रकार की सैन्य अस्थिरता का सीधा असर उनकी सुरक्षा और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले उनके रिश्तेदारों पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, ऑस्ट्रेलिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर है। जलडमरूमध्य में तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में उछाल आने की संभावना है, जो सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेगा।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के विशेषज्ञों का मानना है कि सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी, जिनके परिवार मध्य पूर्व के देशों में बसे हैं, इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के लिए खाड़ी क्षेत्र में शांति और नेविगेशन की स्वतंत्रता अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से इस तनाव को कम किया जा सकता है या यह क्षेत्र एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है।
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