राजनीति
ईरानी ड्रोन्स ने बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना; 70 प्रतिशत लक्ष्यों को भेदने का दावा
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 02:00 pm

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन हमले का दावा किया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
ईरान के अर्ध-सरकारी समाचार संस्थान 'फार्स न्यूज' के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन स्थित रणनीतिक अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर एक बड़ा ड्रोन हमला करने का दावा किया है। ईरानी सैन्य सूत्रों का कहना है कि उनके नए विकसित मानव रहित विमानों (UAVs) ने अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देते हुए 'शेख ईसा एयरबेस' और एक संवेदनशील रडार केंद्र को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है।
तेहरान द्वारा जारी विवरण के अनुसार, इस ऑपरेशन का उद्देश्य हाल ही में ईरानी सैन्य संपत्तियों पर हुए अमेरिकी हमलों का जवाब देना था। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि इन 'नेक्स्ट-जेनरेशन' अटैक ड्रोन्स को विशेष रूप से क्षेत्रीय हवाई सुरक्षा नेटवर्क को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में लगभग 70 प्रतिशत निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता के साथ नष्ट करने का दावा किया गया है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता यह तनाव न केवल वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में भारत के गहरे आर्थिक हित और लाखों प्रवासी भारतीय वहां कार्यरत हैं। खाड़ी देशों में किसी भी प्रकार की सैन्य अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और हवाई यात्रा के मार्गों पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच कनेक्टिविटी और आयात-निर्यात प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन युद्ध के इस नए चरण ने मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को चुनौती दी है। अमेरिका की 'सेंट्रल कमांड' (CENTCOM) ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ड्रोन तकनीक में ईरान की बढ़ती क्षमता ने क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों को रक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति के पक्षधर हैं, इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार अक्सर मध्य पूर्व में तनाव कम करने की अपील करती रही है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख केंद्र है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव आ सकते हैं, जो खाड़ी के माध्यम से होने वाले प्रवास और व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।
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