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ईरान ने अमेरिका पर लगाया 'प्रतिशोधी व्यवहार' का आरोप: विश्व कप मैचों के लिए वीजा देने से इनकार
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 01:30 pm
ईरानी फुटबॉल महासंघ ने अमेरिका पर भेदभाव का आरोप लगाया है क्योंकि उसके 14 अधिकारियों को आगामी विश्व कप मैचों के लिए वीजा नहीं दिया गया।
ईरानी फुटबॉल महासंघ ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर 'प्रतिशोधी व्यवहार' का गंभीर आरोप लगाया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब आगामी विश्व कप क्वालिफायर मैचों के लिए ईरान के 14 प्रबंधकीय और प्रशासनिक सदस्यों को अमेरिकी वीजा देने से इनकार कर दिया गया। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि यह कदम न केवल खेल भावना के खिलाफ है, बल्कि यह एक 'समान अवसर' (level playing field) के सिद्धांत का भी उल्लंघन करता है।
तेहरान स्थित फुटबॉल महासंघ ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, प्रशासनिक कर्मचारियों को वीजा न देना अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं में भेदभाव को बढ़ावा देता है। महासंघ ने फीफा (FIFA) से हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि खेल का मैदान राजनीतिक शत्रुता से मुक्त रहे।
दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अमेरिकी सुरक्षा प्रोटोकॉल और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि बताया है। हालांकि अमेरिकी विभाग ने व्यक्तिगत वीजा मामलों पर विस्तार से जानकारी देने से परहेज किया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण राजनयिक संबंध अब खेल के मैदान तक पहुंच गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया स्वयं एक खेल प्रेमी राष्ट्र है और यहाँ का प्रवासी समुदाय फीफा विश्व कप जैसे आयोजनों को बड़े उत्साह से देखता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले फुटबॉल प्रशंसक अक्सर अपनी मूल राष्ट्रीय टीमों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का बारीकी से अनुसरण करते हैं। जब किसी अंतरराष्ट्रीय मैच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर वैश्विक प्रशंसक आधार पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और खेल कूटनीति (Sports Diplomacy) के बीच बढ़ती जटिलता को दर्शाती है। यदि प्रमुख टीमों के सहायक स्टाफ को वीजा नहीं मिलता है, तो खिलाड़ियों की तैयारी और मैदान पर उनके प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल, यह देखना बाकी है कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत और फीफा इस कूटनीतिक गतिरोध पर क्या रुख अपनाते हैं।
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