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H-1B वीजा विवाद पर आयोवा गवर्नर की सफाई: नौकरियों में विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देने की खबरों का किया खंडन

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 08:01 am
H-1B वीजा विवाद पर आयोवा गवर्नर की सफाई: नौकरियों में विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देने की खबरों का किया खंडन

आयोवा की गवर्नर किम रेनॉल्ड्स ने स्पष्ट किया है कि राज्य की परियोजनाओं में H-1B वीजा धारकों को नियुक्त करने का कोई विचार नहीं था, जिससे स्थानीय नौकरियों के खतरों की आशंकाएं शांत हुई हैं।

अमेरिका के आयोवा राज्य में नौकरियों के विस्थापन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, गवर्नर किम रेनॉल्ड्स ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि उनके प्रशासन की वार्ताओं के दौरान कभी भी H-1B वीजा धारकों को नियुक्त करने का विकल्प विचाराधीन नहीं था। यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि विदेशी कुशल कामगारों को स्थानीय पेशेवरों की जगह दी जा सकती है, जिससे न केवल अमेरिका बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय समुदाय में भी हलचल पैदा हो गई थी। गवर्नर रेनॉल्ड्स ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता हमेशा स्थानीय कार्यबल को सशक्त बनाना और आयोवा के निवासियों के लिए रोजगार के अवसर सुरक्षित करना रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के अनुबंधों या परियोजनाओं के दौरान विदेशी कामगारों के उपयोग पर चर्चा नहीं की गई। यह मुद्दा तब गरमाया जब कुछ श्रमिक संगठनों और स्थानीय समूहों ने आशंका व्यक्त की थी कि लागत कम करने के लिए प्रशासन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आउटसोर्सिंग या वीजा-आधारित नियुक्तियों का सहारा ले सकता है। H-1B वीजा कार्यक्रम, जो मुख्य रूप से भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करने का सबसे बड़ा जरिया है, अक्सर राजनीतिक और आर्थिक बहसों के केंद्र में रहता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है, क्योंकि कुशल आव्रजन (Skilled Migration) और नौकरियों के संरक्षण का मुद्दा दोनों देशों में समान रूप से संवेदनशील है। जिस तरह अमेरिका में स्थानीय बनाम विदेशी कामगारों की बहस चलती है, वैसी ही स्थिति अक्सर ऑस्ट्रेलिया में 'सबक्लास 482' वीजा के संदर्भ में देखी जाती है। आयोवा प्रशासन का यह रुख दर्शाता है कि आगामी चुनावों और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में अमेरिकी राजनेता संरक्षणवादी नीतियों को अधिक महत्व दे रहे हैं। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि कुशल पेशेवरों की कमी को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं की आवश्यकता बनी रहेगी। गवर्नर के इस कड़े रुख ने उन भारतीय तकनीकी पेशेवरों के बीच चिंता पैदा की है जो अमेरिका में भविष्य तलाश रहे हैं। कुल मिलाकर, गवर्नर रेनॉल्ड्स का बयान एक राजनीतिक संतुलन बनाने का प्रयास है, जिससे वे स्थानीय मतदाताओं को आश्वस्त कर सकें कि उनकी नौकरियां सुरक्षित हैं। हालांकि, इससे आव्रजन नीतियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारतीय पेशेवरों के लिए, चाहे वे अमेरिका में हों या ऑस्ट्रेलिया में, बदलती नीतियों और स्थानीय रोजगार कानूनों पर नजर रखना अनिवार्य हो गया है।
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