राजनीति
टीएमसी में आंतरिक कलह: ममता बनर्जी की अहम बैठक में रही कम उपस्थिति, बढ़ी बगावत की सुगबुगाहट
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 08:30 pm

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेद गहराते जा रहे हैं। ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई हालिया बैठक में नेताओं की कम उपस्थिति ने पार्टी के भविष्य और उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई हालिया संगठनात्मक बैठक में पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों की बेहद कम उपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। इस घटनाक्रम को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और सीधे तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व को दी जा रही चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का उद्देश्य आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करना और आंतरिक अनुशासन को मजबूत करना था। हालांकि, सांसदों और विधायकों की एक बड़ी संख्या की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर गहरी दरार को उजागर कर दिया है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा और संसद दोनों जगहों पर पार्टी के भीतर विद्रोह की खबरें तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी में 'पुराने बनाम नए' गुट की लड़ाई अब खुलकर सामने आ रही है।
बढ़ती बगावत को नियंत्रित करने के लिए ममता बनर्जी अब एक बड़ा दांव खेलने पर विचार कर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह राज्य की राजनीति से हटकर फिर से लोकसभा का रुख कर सकती हैं ताकि दिल्ली में रहकर पार्टी के सांसदों पर सीधा नियंत्रण रखा जा सके और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का चेहरा बनी रहें। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी जोरों पर है कि कुछ वरिष्ठ नेता शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली से खुश नहीं हैं और वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से प्रवासी बंगाली समुदाय के लिए पश्चिम बंगाल की यह अस्थिरता चिंता का विषय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासियों का अपने गृह राज्य की राजनीति से गहरा जुड़ाव रहता है। वहां होने वाली कोई भी उथल-पुथल सीधे तौर पर विदेशी निवेश और विकास परियोजनाओं को प्रभावित करती है, जिसमें कई एनआरआई (NRI) रुचि रखते हैं।
फिलहाल, टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने कुनबे को एकजुट रखने की है। यदि ममता बनर्जी जल्द ही स्थिति को संभालने में विफल रहती हैं, तो आने वाले महीनों में पार्टी में बड़े स्तर पर दलबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आगामी कुछ सप्ताह टीएमसी और ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे।
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