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अमेरिकी सीनेटर जॉन केनेडी का तीखा हमला: आव्रजन एजेंसी को 'नस्लवादी' बताने वाले नेताओं को 'मूर्ख' करार दिया
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 11:30 am

अमेरिकी सीनेटर जॉन केनेडी ने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील धड़े की कड़ी आलोचना करते हुए आव्रजन कानूनों को सख्ती से लागू करने की वकालत की है।
वाशिंगटन: अमेरिकी सीनेट में हाल ही में दिए गए एक संबोधन में लुइसियाना के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन केनेडी ने आव्रजन और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के उन प्रगतिशील सदस्यों की तीखी आलोचना की, जो अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) को 'नस्लवादी' बताते रहे हैं। केनेडी ने इस तरह के बयानों को 'औद्योगिक स्तर की मूर्खता' (Industrial Strength Stupid) करार देते हुए कहा कि सीमा पर कानून का शासन होना अनिवार्य है।
सीनेटर केनेडी ने विशेष रूप से एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेस (AOC) और जोहरा म मदानी जैसे नेताओं के प्रभाव वाले धड़े को निशाने पर लिया। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी देश की संप्रभुता के लिए उसकी सीमाओं का सुरक्षित होना आवश्यक है और जो लोग प्रवर्तन एजेंसियों को बदनाम कर रहे हैं, वे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। केनेडी ने आईसीई (ICE) और बॉर्डर पेट्रोल के लिए बजट आवंटन का जोरदार समर्थन किया और कहा कि इन एजेंसियों के बिना देश में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण पाना असंभव होगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों ही देश वर्तमान में अपनी आव्रजन नीतियों और सीमा नियंत्रण को लेकर कड़े बदलावों के दौर से गुजर रहे हैं। जहां ऑस्ट्रेलिया में 'अवैध आव्रजन' और 'वीजा अनुपालन' को लेकर सख्त कानून बनाए जा रहे हैं, वहीं अमेरिका में हो रही यह राजनीतिक बहस वैश्विक स्तर पर आव्रजन के प्रति बदलते रुख को दर्शाती है। भारतीय प्रवासियों के लिए, जो अक्सर कानूनी आव्रजन प्रक्रियाओं का पालन करते हैं, यह बहस इस बात पर केंद्रित है कि किस प्रकार सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाया जाए।
केनेडी ने अपने भाषण के दौरान इस बात पर जोर दिया कि आव्रजन कानूनों का विरोध करना और कानून लागू करने वाली संस्थाओं पर नस्लवाद का आरोप लगाना केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियम आधारित व्यवस्था ही एकमात्र रास्ता है। इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर आव्रजन सुधार बनाम सख्त प्रवर्तन की बहस छिड़ गई है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में आगामी चुनावों के मद्देनजर सीमा सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रगतिशील नेताओं का तर्क है कि मौजूदा प्रवर्तन नीतियां अल्पसंख्यकों और शरणार्थियों के प्रति पक्षपाती हैं, जबकि केनेडी जैसे नेता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का प्राथमिक विषय मानते हैं।
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