राजनीति
अमेरिकी दबाव को पछाड़ भारत का रूस से तेल आयात 34% बढ़ा, रणनीतिक स्वायत्तता की एक और जीत
ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 03:31 am

अमेरिकी दबाव और टैरिफ की धमकियों के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखा है। जून में इसमें 34% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीति में भारत ने एक बार फिर अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' का लोहा मनवाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगातार दी जा रही टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों की धमकियों के बावजूद, भारत ने रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, केवल जून महीने में ही रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात में 34 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा उन पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ा संदेश है जो रूस पर कड़े प्रतिबंधों के जरिए उसकी अर्थव्यवस्था को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत और रूस की यह अटूट साझेदारी न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में, यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया है। जबकि पश्चिमी देशों ने भारत पर रूसी तेल खरीदने से बचने का दबाव डाला था, नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया कि उसकी पहली प्राथमिकता अपने 1.4 बिलियन नागरिकों के हितों और घरेलू अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाना है। जून की इस बढ़ोतरी ने यह साबित कर दिया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियां और टैरिफ लगाने की संभावित चेतावनी भारत की विदेश नीति को प्रभावित करने में विफल रही हैं। भारत अब न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति भी है। ऐसे में, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे क्वाड (Quad) देशों के साथ प्रगाढ़ संबंधों के बावजूद, भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर अडिग है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों के लिए भी यह खबर गर्व का विषय है, क्योंकि यह भारत की मजबूत छवि को दर्शाता है जो किसी एक खेमे में बंधने के बजाय राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है।
व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी क्रूड को अधिक प्राथमिकता दी है क्योंकि यह मध्य पूर्वी तेल की तुलना में सस्ता पड़ता है। इससे न केवल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हुआ है, बल्कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद मिली है। जून में 34% की वृद्धि दर्शाती है कि रसद और भुगतान प्रणालियों से जुड़ी चुनौतियों को भी भारत ने सफलतापूर्वक हल कर लिया है।
अंततः, यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति के बदलते समीकरणों को रेखांकित करता है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी रक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी तीसरे देश के निर्देशों का पालन नहीं करेगा। चाहे वह रूस से S-400 मिसाइल प्रणाली का सौदा हो या कच्चे तेल का आयात, भारत की नीति केवल 'इंडिया फर्स्ट' यानी 'भारत प्रथम' पर आधारित है। रूस से तेल आयात में हुई यह बढ़ोतरी उसी दृढ़ संकल्प का परिणाम है।
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