राजनीति
मोदी सरकार के तहत भारत की विदेश नीति: वैश्विक मंच पर उभरी एक नई पहचान
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 12:30 am

पिछले दशक में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में बड़े बदलाव आए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर देश का प्रभाव और कद काफी बढ़ा है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत की विदेश नीति ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस अवधि में वैश्विक मंच पर भारत के प्रभाव और कद में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि भारत की 'सक्रिय और प्रभावी' कूटनीति ने उसे दुनिया की प्रमुख शक्तियों के बीच एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया है।
भारत की इस नई विदेश नीति का केंद्र बिंदु 'साझा हितों' और 'रणनीतिक स्वायत्तता' पर आधारित रहा है। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत ने न केवल पश्चिम के देशों के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ किया है, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर भी उभरा है। क्वाड (QUAD) जैसे समूहों में भारत की सक्रिय भागीदारी और जी-20 की सफल अध्यक्षता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नई दिल्ली अब केवल वैश्विक घटनाओं का अनुसरण नहीं करती, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की यह बढ़ती साख विशेष महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों में आई मजबूती, विशेषकर ईसीटीए (ECTA) जैसे व्यापारिक समझौतों और सुरक्षा सहयोग ने प्रवासियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में प्रधानमंत्री मोदी के भव्य कार्यक्रमों ने भारतीय प्रवासियों को भारत की सॉफ्ट पावर के दूत के रूप में स्थापित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी सरकार की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीतियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा दिया है। इसके साथ ही, संकट के समय में अन्य देशों की सहायता करने की भारत की तत्परता, जैसे कि 'वैक्सीन मैत्री' अभियान, ने उसे एक 'विश्व बंधु' के रूप में पहचान दिलाई है। आने वाले समय में, तकनीकी सहयोग और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका और भी निर्णायक होने की उम्मीद है।
आलोचकों के बीच बहस के बावजूद, यह निर्विवाद है कि भारत की वर्तमान विदेश नीति अधिक मुखर और आत्मविश्वास से भरी है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह 'नया भारत' अपनी सुरक्षा और हितों के साथ समझौता किए बिना विश्व शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।
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