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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण सफल: जींद-सोनीपत रूट पर 75 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी 'ग्रीन' रेल
ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 02:31 am

भारतीय रेल अपनी पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरियाणा के जींद-सोनीपत मार्ग पर लॉन्च करने के लिए तैयार है, जो शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारतीय रेलवे एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने की दहलीज पर खड़ा है। देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन जल्द ही हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर अपनी व्यावसायिक यात्रा शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पर्यावरण अनुकूल परिवहन की दिशा में यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है, जो न केवल प्रदूषण को कम करेगा बल्कि भारतीय रेलवे को आधुनिक वैश्विक मानकों के करीब ले जाएगा। यह पहल भारत सरकार के 'नेट ज़ीरो कार्बन एमिटर' बनने के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का हिस्सा है, जिसे 2030 तक पूरा करने की योजना बनाई गई है।
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो, इस नई ट्रेन को 10 कोच वाले हाइड्रोजन-चालित डीईएमयू (DEMU) सेट के रूप में विकसित किया गया है। ट्रेन की यात्री क्षमता काफी प्रभावशाली है; इसमें बैठने के लिए 682 सीटें उपलब्ध हैं, जबकि खड़े होकर यात्रा करने वाले यात्रियों को मिलाकर यह एक बार में कुल 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। परीक्षणों के दौरान, इस ट्रेन ने अपनी निर्धारित परिचालन गति 75 किमी प्रति घंटा को सफलतापूर्वक हासिल किया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेन इससे भी अधिक गति पर दौड़ने की क्षमता रखती है, लेकिन सुरक्षा और शुरुआती चरणों को देखते हुए इसे एक नियंत्रित गति पर चलाया जाएगा।
हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका इंजन है। पारंपरिक डीजल इंजनों के विपरीत, हाइड्रोजन इंजन केवल जल वाष्प (water vapor) और गर्मी उत्सर्जित करते हैं। इसमें कोई हानिकारक धुआं या नाइट्रोजन ऑक्साइड नहीं निकलता, जो इसे पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाता है। इस परियोजना के लिए जींद में विशेष रूप से एक हाइड्रोजन प्लांट और रिफ्यूलिंग स्टेशन भी स्थापित किया गया है, ताकि ट्रेन के संचालन में कोई बाधा न आए। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रेन के सफल संचालन के बाद देश के अन्य पहाड़ी और कम आबादी वाले रूटों पर भी ऐसी ही 8 और हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना है।
प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीयों के लिए यह खबर अत्यंत गर्व का विषय है। जिस प्रकार ऑस्ट्रेलिया अपनी हाइड्रोजन ऊर्जा नीतियों और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है, ठीक उसी राह पर भारत का बढ़ना दोनों देशों के बीच भविष्य के तकनीकी सहयोग की संभावनाओं को बढ़ाता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के इंजीनियर और पर्यावरण विशेषज्ञ भारत की इस प्रगति को वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन (Global Energy Transition) के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देख रहे हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, जींद-सोनीपत रूट पर इस ट्रेन का चलना केवल हरियाणा के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक तकनीकी क्रांति की शुरुआत है। यह न केवल यात्रियों को एक शोर-मुक्त और आरामदायक सफर प्रदान करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित भविष्य की नींव भी रखेगी।
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