राजनीति
भारत के रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल: वित्त वर्ष 2025-26 में 60% की रिकॉर्ड वृद्धि
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 06:37 am
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात में 60 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है, जो वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
नई दिल्ली: भारत के रक्षा क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल रक्षा निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यह उछाल न केवल भारतीय रक्षा विनिर्माण की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहल की सफलता पर भी मुहर लगाता है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्तीय वर्ष में निर्यात का स्तर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि भारत के उस लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसके तहत देश को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों की सूची में शामिल करना है। पिछले एक दशक में भारत ने अपनी पहचान दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक से बदलकर एक उभरते हुए निर्यातक के रूप में बनाई है।
इस शानदार प्रदर्शन के पीछे कई प्रमुख कारण रहे हैं। सरकार द्वारा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देना और नीतिगत सुधारों ने इस प्रक्रिया को गति दी है। इसके अलावा, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, स्वदेशी रूप से विकसित तेजस लड़ाकू विमान, आर्टिलरी गन और रडार प्रणालियों की वैश्विक मांग में काफी वृद्धि हुई है। दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई देशों ने भारतीय रक्षा उपकरणों में गहरी रुचि दिखाई है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर रणनीतिक महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा संबंधों और 'क्वाड' (QUAD) जैसे मंचों पर बढ़ती साझेदारी के बीच, भारत की यह आत्मनिर्भरता हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का मजबूत रक्षा आधार क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। भारत सरकार ने अगले कुछ वर्षों के लिए और भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। निर्यात प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए शुरू किया गया 'सिंगल विंडो' क्लीयरेंस सिस्टम और विदेशी खरीदारों के लिए आसान ऋण सुविधाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय कंपनियों के लिए रास्ते खोल दिए हैं। निजी क्षेत्र की कंपनियां अब कुल रक्षा निर्यात में लगभग 25 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रही हैं, जो भारतीय उद्योग की बदलती तस्वीर को बयां करता है।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 भारत के रक्षा उद्योग के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। 60 प्रतिशत की यह वृद्धि न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक पटल पर उसकी बढ़ती धमक का प्रमाण भी है।
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