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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के रक्षा विनिर्माण में वैश्विक उछाल: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 06:31 am
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के रक्षा विनिर्माण में वैश्विक उछाल: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय रक्षा तकनीक में वैश्विक रुचि को बढ़ावा दिया है, जिससे 2014 के बाद से उत्पादन में 174% की वृद्धि हुई है।

नई दिल्ली: केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के सफल कार्यान्वयन के बाद भारतीय रक्षा प्रौद्योगिकियों के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण में भारी बदलाव आया है। सिंह के अनुसार, भारत अब केवल एक आयातक देश नहीं रहा, बल्कि रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरा है। आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि साल 2014 के बाद से भारत के रक्षा उत्पादन में 174 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' विजन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पहले भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में गिना जाता था, लेकिन आज स्थिति यह है कि इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देश भारतीय रक्षा प्रणालियों और तकनीक में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं और सक्रिय रूप से निर्यात के सौदे कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के सामरिक महत्व पर चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि इसने भारतीय नवाचार की क्षमता को साबित किया है। इस पहल ने न केवल सीमा सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की विश्वसनीयता को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। भारत द्वारा निर्मित मिसाइल सिस्टम, रडार और हल्के लड़ाकू विमानों की मांग अब दक्षिण-पूर्वी एशिया और अफ्रीका के देशों में तेजी से बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर गौरव का विषय है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और 'क्वाड' (QUAD) जैसे मंचों पर बढ़ती भागीदारी के बीच, भारत की मजबूत होती रक्षा स्थिति हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रक्षा और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े प्रवासी भारतीय इन विकासों को भारत की बढ़ती 'सॉफ्ट' और 'हार्ड' पावर के संगम के रूप में देख रहे हैं। मंत्री ने निष्कर्ष निकाला कि रक्षा स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या और निजी क्षेत्र की भागीदारी इस विकास की मुख्य चालक रही है। आने वाले वर्षों में, भारत का लक्ष्य अपनी निर्यात क्षमता को और अधिक बढ़ाना है, ताकि वह वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का एक अपरिहार्य हिस्सा बन सके। यह प्रगति न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को भी सुनिश्चित करती है।
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