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E20 पेट्रोल पर विवाद के बीच CEA वी. अनंत नागेश्वरन का सुझाव, पुरानी गाड़ियों के लिए फिर शुरू हो E10 की बिक्री
ICN24 Newsroom 17 अग॰ 2026, 05:37 pm
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पुरानी गाड़ियों के इंजन की सुरक्षा और माइलेज की समस्याओं को देखते हुए E10 पेट्रोल को वापस लाने का सुझाव दिया है।
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब एक नई बहस के केंद्र में है। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जिसमें उन्होंने पुरानी गाड़ियों के मालिकों के हितों की रक्षा के लिए E10 पेट्रोल (10% इथेनॉल मिश्रण) को फिर से बाजार में उपलब्ध कराने की बात कही है। वर्तमान में, भारत सरकार तेजी से E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रण) को पूरे देश में लागू करने की दिशा में बढ़ रही है, लेकिन इस बदलाव ने वाहन मालिकों और विशेषज्ञों के बीच चिंता पैदा कर दी है।
संसद से लेकर सोशल मीडिया तक, E20 ईंधन को लेकर वाहन चालकों की शिकायतें बढ़ रही हैं। उपभोक्ताओं का मुख्य तर्क है कि उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले इस ईंधन के कारण वाहनों के माइलेज में गिरावट आ रही है। इसके अलावा, तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी गाड़ियाँ, जो विशेष रूप से E20 के अनुकूल नहीं बनाई गई हैं, उनके इंजन घटकों जैसे रबर की पाइपों, सील और गैस्केट में तेजी से खराबी आ रही है। इथेनॉल की प्रकृति संक्षारक (corrosive) होती है, जो पुराने इंजन के मेटालिक और नॉन-मेटालिक हिस्सों को नुकसान पहुँचा सकती है।
CEA वी. अनंत नागेश्वरन का यह सुझाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार है जब सरकार के किसी उच्च पदस्थ अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता की आवश्यकता को स्वीकार किया है। नागेश्वरन ने संकेत दिया है कि जब तक देश का पूरा वाहन बेड़ा E20 के अनुकूल नहीं हो जाता, तब तक पुरानी गाड़ियों के लिए कम इथेनॉल वाला विकल्प मौजूद रहना चाहिए। इससे न केवल ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सकेगा, बल्कि पुरानी गाड़ियों के इंजन की उम्र भी बढ़ेगी।
भारत के इस ऊर्जा संक्रमण का प्रभाव प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए भी प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में E10 ईंधन काफी समय से प्रचलित है, लेकिन वहां वाहन मालिकों को हमेशा यह विकल्प दिया जाता है कि वे अपनी गाड़ी की क्षमता के अनुसार प्रीमियम या अनलेडेड पेट्रोल चुन सकें। भारत में भी इसी तरह के 'कंज्यूमर चॉइस' मॉडल की मांग की जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई भारतीय, जिनके परिवार भारत में अभी भी पुरानी पीढ़ी की कारों या दोपहिया वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, इस नीतिगत बदलाव को लेकर उत्सुक हैं क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके परिजनों के परिवहन खर्च और वाहन के रखरखाव को प्रभावित करता है।
सरकार का लक्ष्य इथेनॉल सम्मिश्रण के माध्यम से कच्चे तेल के आयात बिल को कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। हालांकि, CEA के हालिया रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने की प्रक्रिया में उपभोक्ताओं की व्यावहारिक समस्याओं और वाहन की कार्यक्षमता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि पेट्रोलियम मंत्रालय इस सुझाव पर क्या कदम उठाता है और क्या देश के पेट्रोल पंपों पर फिर से E10 की वापसी होगी।
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