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'माफ करें, आज हम आपको वीजा नहीं दे सकते': भारतीय छात्र का अमेरिकी वीजा रिजेक्ट, रेडिट यूजर्स ने बताई बड़ी गलती

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 08:01 am
'माफ करें, आज हम आपको वीजा नहीं दे सकते': भारतीय छात्र का अमेरिकी वीजा रिजेक्ट, रेडिट यूजर्स ने बताई बड़ी गलती

एक भारतीय छात्र का अमेरिकी F1 वीजा आवेदन खारिज होने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई है। विशेषज्ञों ने इंटरव्यू के दौरान दी गई एक विशेष जानकारी को इस रिजेक्शन का मुख्य कारण बताया है।

उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए वीजा इंटरव्यू सबसे महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण पड़ाव होता है। हाल ही में एक भारतीय छात्र की कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'रेडिट' पर वायरल हो रही है, जिसमें उसने विस्तार से बताया है कि कैसे एक छोटी सी चूक के कारण उसका अमेरिकी F1 वीजा आवेदन खारिज कर दिया गया। छात्र ने रेडिट पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स करने के लिए अमेरिका जाना चाहता था। इंटरव्यू के दौरान काउंसलर अधिकारी ने उससे कई सवाल पूछे, जिनमें से अधिकांश के जवाब उसने आत्मविश्वास के साथ दिए। हालांकि, जब अधिकारी ने उससे भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा, तो छात्र का जवाब उसके लिए भारी पड़ गया। छात्र ने स्वीकार किया कि उसने इंटरव्यू के दौरान अपनी भविष्य की करियर संभावनाओं के बारे में बात करते हुए गलती से अमेरिकी जॉब मार्केट का जिक्र कर दिया था। इंटरव्यू के अंत में अधिकारी ने उसे '214(b)' फॉर्म थमाते हुए कहा, "मुझे खेद है, लेकिन मैं आज आपको वीजा नहीं दे सकता।" गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिकी आव्रजन कानून के तहत धारा 214(b) का अर्थ है कि आवेदक यह साबित करने में विफल रहा कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने देश (भारत) वापस लौट आएगा। रेडिट पर अनुभवी यूजर्स और आव्रजन विशेषज्ञों ने इस पर अपनी राय साझा की। अधिकांश लोगों का मानना है कि छात्र की सबसे बड़ी गलती 'इमिग्रेशन इंटेंट' (प्रवास की मंशा) दिखाना था। वीजा नियमों के अनुसार, छात्र वीजा प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि आप इंटरव्यूअर को यह विश्वास दिलाएं कि आपके भारत के साथ मजबूत संबंध हैं और आपकी मंशा केवल पढ़ाई की है, न कि वहां बसने या नौकरी करने की। यह घटना केवल अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी एक बड़ा सबक है। ऑस्ट्रेलिया में भी हाल के महीनों में 'जेन्युइन स्टूडेंट' (GS) टेस्ट के तहत वीजा नियमों को कड़ा किया गया है। ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग भी अब छात्रों की वापसी की योजनाओं और उनके घरेलू देश से जुड़ाव को बारीकी से परखता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि वीजा इंटरव्यू के दौरान हमेशा अपनी पढ़ाई और उसके बाद भारत में मिलने वाले अवसरों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि मेजबान देश में मिलने वाली नौकरियों पर।
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