राजनीति
लंदन में न्यायमूर्ति सूर्यकांत के व्याख्यान में व्यवधान की भारतीय दूतावास ने की निंदा, 'गरिमापूर्ण संवाद' की अपील
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 08:00 pm

लंदन के बर्कबेक कॉलेज में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के व्याख्यान के दौरान हुए हंगामे पर भारतीय उच्चायोग ने कड़ी आपत्ति जताई है।
लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के बर्कबेक कॉलेज में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत के व्याख्यान के दौरान हुए हंगामे की कड़े शब्दों में निंदा की है। भारतीय मिशन ने इस घटना को 'अशोभनीय व्यवहार' करार देते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां गरिमापूर्ण सार्वजनिक संवाद के सिद्धांतों के विपरीत हैं।
आधिकारिक बयान में भारतीय उच्चायोग ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंचों पर हो रही चर्चाओं में बाधा डाली जाए। मिशन ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक मूल्यों और कानूनी सिद्धांतों पर चर्चा के लिए एक शांतिपूर्ण और सम्मानजनक वातावरण अनिवार्य है। यह घटना तब हुई जब न्यायमूर्ति सूर्यकांत कानून और न्याय से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय पर संबोधन दे रहे थे, जिसमें दर्शकों के एक छोटे समूह ने नारेबाजी कर व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास किया।
भारतीय मिशन ने अपने वक्तव्य में कहा, "हम न्यायमूर्ति सूर्यकांत के व्याख्यान के दौरान दर्शकों के एक वर्ग द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं। इस तरह का आचरण न केवल अतिथि का अपमान है, बल्कि यह उस शैक्षणिक शुचिता को भी नुकसान पहुँचाता है जिसका पालन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाना चाहिए।"
यह घटना वैश्विक स्तर पर भारतीय गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा और उनके कार्यक्रमों की गरिमा को लेकर नई बहस छेड़ती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह समाचार प्रासंगिक है, क्योंकि पिछले कुछ समय में सिडनी, मेलबर्न और कैनबरा जैसे शहरों में भी भारतीय राजनयिकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान इसी तरह के प्रदर्शन और व्यवधान देखे गए हैं। प्रवासी भारतीयों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि शैक्षणिक और सामाजिक मंचों का उपयोग वैचारिक मतभेदों को हिंसक या आक्रामक तरीके से व्यक्त करने के लिए किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका के बीच इस तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। हालांकि, भारतीय उच्चायोग ने स्पष्ट किया है कि भारत संवाद के माध्यम से समाधान निकालने में विश्वास रखता है, न कि शोर-शराबे और व्यवधान के माध्यम से। मिशन ने आयोजकों और स्थानीय अधिकारियों से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाने की अपेक्षा की है ताकि लोकतांत्रिक चर्चाओं का स्तर बना रहे।
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