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अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रवासियों का दबदबा: 96 यूनिकॉर्न कंपनियों के साथ रची नई इबारत
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 02:00 am
एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में भारतीय मूल के उद्यमियों ने 96 यूनिकॉर्न कंपनियां खड़ी की हैं, जो किसी भी अन्य प्रवासी समूह से अधिक है।
संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रवासियों की भूमिका अब केवल श्रम शक्ति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे वहां के नवाचार और उद्यमशीलता के सबसे बड़े स्तंभ बनकर उभरे हैं। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) द्वारा अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मूल के उद्यमियों ने अमेरिका में कुल 96 'यूनिकॉर्न' (1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाली स्टार्टअप कंपनियां) की स्थापना की है। यह संख्या किसी भी अन्य प्रवासी समूह की तुलना में सर्वाधिक है, जो वैश्विक व्यापार मंच पर भारतीयों की बढ़ती साख को दर्शाती है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि अमेरिकी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवासियों का योगदान अभूतपूर्व रहा है। अमेरिका की आधी से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियों के कम से कम एक संस्थापक प्रवासी हैं। इस सूची में भारत शीर्ष पर है, जो न केवल तकनीकी कौशल बल्कि नेतृत्व क्षमता में भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर रहा है। इन कंपनियों ने न केवल अरबों डॉलर की संपत्ति सृजित की है, बल्कि लाखों की संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं, जिससे अमेरिकी जीडीपी को नई गति मिली है।
भारत के बाद इजराइल और कनाडा जैसे देशों का स्थान आता है, लेकिन भारतीय उद्यमियों का प्रभाव व्यापक क्षेत्रों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और हेल्थकेयर में फैला हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता उचित आव्रजन नीतियों और प्रतिभा को मिलने वाले मंच का परिणाम है। यदि अमेरिका अपनी वीजा नीतियों में कड़ाई करता है, तो इसका सीधा असर इस नवाचार चक्र पर पड़ सकता है, जिसे '5 ट्रिलियन डॉलर यूनिकॉर्न इकोनॉमी' कहा जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर अत्यंत उत्साहजनक है। जिस तरह अमेरिका में भारतीय प्रवासियों ने आर्थिक ढांचे को बदला है, वैसी ही झलक सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन के स्टार्टअप हब में भी देखने को मिल रही है। ऑस्ट्रेलिया की 'ग्लोबल टैलेंट वीजा' योजनाओं के तहत अधिक से अधिक भारतीय पेशेवर अब यहां अपनी कंपनियां शुरू कर रहे हैं। एनएफएपी की यह रिपोर्ट यह पुख्ता करती है कि भारतीय डायस्पोरा चाहे जहां भी हो, वह उस देश की प्रगति में निवेश और नवाचार का मुख्य स्रोत बनता है।
अंततः, यह अध्ययन वैश्विक स्तर पर प्रतिभा के मुक्त प्रवाह के महत्व को रेखांकित करता है। भारतीय मूल के संस्थापकों की यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह अन्य विकसित देशों के लिए एक केस स्टडी भी है कि कैसे प्रवासी प्रतिभा का सही उपयोग कर एक आधुनिक और सुदृढ़ अर्थव्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है।
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