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H-1B वीजा पर अमेरिका में छंटनी का शिकार हुआ भारतीय पेशेवर, पत्नी का वीजा भी हुआ रिजेक्ट; अब भारत वापसी की तैयारी
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 06:30 pm

अमेरिका में कार्यरत एक वरिष्ठ भारतीय वित्तीय विश्लेषक ने छंटनी और वीजा संबंधी मुश्किलों के बाद अपनी आपबीती साझा की है।
अमेरिका में सूचना प्रौद्योगिकी और वित्त क्षेत्रों में जारी छंटनी के दौर ने एक बार फिर भारतीय पेशेवरों की असुरक्षा को उजागर कर दिया है। हाल ही में एक वरिष्ठ भारतीय वित्तीय विश्लेषक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपनी 'क्रूर' (brutal) आपबीती साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे तीन महीने पहले नौकरी जाने के बाद उनका जीवन अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है।
सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एएमडी (AMD) में कार्यरत रहे इस पेशेवर के पास वित्त क्षेत्र में छह साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने बताया कि एच-1बी (H-1B) वीजा पर रहते हुए नौकरी खोना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है, क्योंकि इसमें एक सीमित समय सीमा (ग्रेस पीरियड) के भीतर नई नौकरी ढूंढनी होती है, अन्यथा देश छोड़ने का दबाव बढ़ जाता है। उनकी मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब उनकी पत्नी का एच-4 (H4) आश्रित वीजा भी रिजेक्ट हो गया।
पीड़ित पेशेवर ने अपनी पोस्ट में लिखा, "पिछले तीन महीने बेहद कठिन रहे हैं। वरिष्ठ पद और अनुभव होने के बावजूद बाजार की स्थिति ऐसी है कि अवसर सीमित हैं। अब पत्नी का वीजा रिजेक्ट होने के बाद हम वापस भारत लौटने के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं।" यह कहानी उन हजारों भारतीयों की व्यथा को दर्शाती है जो 'अमेरिकन ड्रीम' को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन वीजा नीतियों और आर्थिक अस्थिरता के कारण अचानक अधर में लटक जाते हैं।
यह मामला केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी एक चेतावनी और सबक है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया की वीजा प्रणाली अमेरिका की तुलना में कुछ मायनों में अधिक स्थायी मार्ग प्रदान करती है, लेकिन वहां भी कौशल आधारित वीजा (Skilled Visas) पर निर्भर पेशेवरों को इसी तरह की आर्थिक मंदी का डर सताता रहता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय प्रवासी अक्सर चर्चा करते हैं कि क्या केवल एक देश पर निर्भर रहना सुरक्षित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं 'रिवर्स माइग्रेशन' (स्वदेश वापसी) के चलन को बढ़ावा दे रही हैं। भारत में बढ़ते अवसर और तकनीकी विकास अब कई प्रवासियों को अपने देश लौटने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जहां उन्हें वीजा की अनिश्चितताओं और परिवार से दूर रहने की मजबूरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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