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ईरान-इजरायल तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार में उछाल, आईटी शेयरों को H-1B फैसले से मिली राहत
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 05:00 pm

ईरान-इजरायल के बीच तनाव कम होने और H-1B वीजा शुल्क पर अदालती फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखी गई।
भारतीय शेयर बाजारों ने सप्ताह की सकारात्मक शुरुआत की है, जहां सोमवार को प्रमुख सूचकांकों में जोरदार बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी के पीछे दो मुख्य कारण रहे: पहला, मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच तनाव में आई कमी, और दूसरा, आईटी क्षेत्र के लिए अमेरिका से आई अनुकूल खबर। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद ने निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष संघर्ष की संभावना कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आई है। यह भारत जैसे देश के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमतों में गिरावट से मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की धारणा पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। इसके अतिरिक्त, एशियाई और यूरोपीय बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने भी घरेलू बाजार को सहारा दिया।
आईटी सेक्टर के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर अमेरिका से आई है। एक अमेरिकी अदालत ने H-1B वीजा आवेदन शुल्क में वृद्धि से संबंधित कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए आईटी कंपनियों के पक्ष में रुख अपनाया है। इस खबर के बाद इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखी गई। भारतीय पेशेवरों और ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत भारतीय आईटी विशेषज्ञों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच एक एकीकृत प्रतिभा नेटवर्क का संचालन करती हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय निवेशक जो घरेलू बाजार में निवेश करते हैं, उनके लिए आईटी शेयरों में यह सुधार पोर्टफोलियो को मजबूती देने वाला साबित हुआ है।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य से देखें तो, भारतीय बाजार में यह सुधार उन प्रवासियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो 'सुपरएनुएशन' या व्यक्तिगत निवेश के माध्यम से भारतीय इक्विटी में एक्सपोजर रखते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी के संकेतों ने प्रवासी भारतीयों के बीच निवेश के भरोसे को फिर से जगाया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर रहती है और आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही परिणाम बेहतर रहते हैं, तो बाजार में यह तेजी जारी रह सकती है।
कारोबार के अंत तक बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे वैश्विक घटनाक्रमों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी बयानों पर पैनी नजर रखें। फिलहाल, भारतीय बाजारों ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच अपनी लचीलापन (resilience) का प्रदर्शन किया है, जिससे निवेशकों को अल्पकालिक राहत मिली है।
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