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रोमानिया में भारतीय निर्माण श्रमिक बना 'नेशनल हीरो', पांच वर्षीय बच्ची की जान बचाने पर मानद नागरिकता से सम्मानित
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 04:31 am
रोमानिया के क्राओवा शहर में भारतीय श्रमिक विपन कुमार ने जमी हुई झील में गिरी बच्ची की जान बचाकर बहादुरी की नई मिसाल पेश की है।
यूरोप के देश रोमानिया से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया में भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। रोमानिया के क्राओवा (Craiova) शहर में कार्यरत एक भारतीय निर्माण श्रमिक, विपन कुमार को उनकी अदम्य वीरता के लिए शहर की मानद नागरिकता (Honorary Citizenship) से सम्मानित किया गया है। विपन ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक पांच साल की मासूम बच्ची को जमी हुई झील के ठंडे पानी में डूबने से बचाया था।
यह घटना तब हुई जब एक स्थानीय पार्क में खेल रही बच्ची दुर्घटनावश झील की पतली बर्फ टूटने से बेहद ठंडे पानी में गिर गई। मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन विपन कुमार ने बिना एक पल गंवाए कड़ाके की ठंड में झील के पानी में छलांग लगा दी। विपन ने उस समय तक बच्ची को अपने हाथों से पानी की सतह से ऊपर उठाए रखा, जब तक कि आपातकालीन बचाव दल वहां नहीं पहुंच गया। हाइपोथर्मिया के खतरे के बावजूद विपन ने तब तक हार नहीं मानी जब तक बच्ची सुरक्षित बाहर नहीं निकल गई।
क्राओवा की मेयर लिया ओल्गुता वासिलस्कु ने विपन की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि उनके इस निस्वार्थ कार्य ने न केवल एक अनमोल जीवन बचाया है, बल्कि मानवता और साहस का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश किया है। स्थानीय प्रशासन ने एक आधिकारिक समारोह में विपन को सम्मानित किया, जहां उन्हें शहर की चाबी सौंपी गई और मानद नागरिक घोषित किया गया। भारतीय राजनयिकों ने भी विपन के इस कृत्य की प्रशंसा की है, इसे प्रवासी भारतीयों की सेवा भावना का प्रतीक बताया है।
यह घटना ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। विपन कुमार की कहानी यह दर्शाती है कि भारतीय प्रवासी न केवल देशों की अर्थव्यवस्था के निर्माण में मदद कर रहे हैं, बल्कि वे उन समाजों के रक्षक और अभिन्न अंग के रूप में भी उभर रहे हैं जहाँ वे रहते हैं।
सोशल मीडिया पर विपन कुमार को 'हीरो ऑफ द डे' कहा जा रहा है। रोमानिया के स्थानीय निवासियों ने उनकी इस बहादुरी को सलाम किया है। विपन की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि साहस की कोई सीमा नहीं होती और एक साधारण श्रमिक भी अपनी मानवता से असाधारण बदलाव ला सकता है।
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