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भारत और स्विट्जरलैंड ने आर्थिक संबंधों को मजबूती देने का संकल्प दोहराया, गोयल ने व्यापार समझौते पर की चर्चा
ICN24 Admin 13 जून 2026, 06:08 am

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्विट्जरलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री के साथ मुलाकात की, जिसमें भारत-EFTA व्यापार समझौते और निवेश संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
नई दिल्ली। भारत और स्विट्जरलैंड ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड की आर्थिक मामलों की राज्य सचिव हेलेन बुडलिगर आर्टिडा के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हस्ताक्षरित व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) का सफल कार्यान्वयन था।
बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी अब एक नए युग में प्रवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि TEPA केवल एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच भरोसे और साझा विकास की नींव है। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस समझौते के माध्यम से स्विट्जरलैंड से भारत में निवेश का प्रवाह बढ़ेगा और भारतीय स्टार्टअप्स व तकनीकी क्षेत्रों को वैश्विक मंच मिलेगा।
आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के उद्देश्य से दोनों नेताओं ने निवेश के उन क्षेत्रों की पहचान की जहां स्विट्जरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की बढ़ती बाजार क्षमता एक-दूसरे की पूरक बन सकती हैं। चर्चा में मुख्य रूप से अक्षय ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया गया।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि भारत की विकास यात्रा में स्विट्जरलैंड एक महत्वपूर्ण भागीदार है। उन्होंने कहा कि भारत में हो रहे ढांचागत सुधार और व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) की दिशा में उठाए गए कदम स्विट्जरलैंड के निवेशकों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहे हैं।
गौरतलब है कि भारत और EFTA देशों (स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टीन) ने इस साल की शुरुआत में एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। यह समझौता भारत के लिए यूरोप के साथ अपने व्यापारिक संतुलन को बेहतर बनाने का एक बड़ा माध्यम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्च स्तरीय वार्ताएं समझौते के कार्यान्वयन में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने में सहायक होती हैं। स्विट्जरलैंड ने भी भारत की उभरती अर्थव्यवस्था में गहरी रुचि दिखाई है और विशेष रूप से 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत विनिर्माण इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं को तलाशा है। अंततः, यह सहयोग न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।
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