राजनीति
भारत के प्रमुख ठिकानों पर ड्रोन हमले का अलर्ट: केंद्र ने सुरक्षा बढ़ाई, एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती शुरू
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 11:31 pm
केंद्र सरकार ने सीमावर्ती और समुद्री क्षेत्रों में महत्वपूर्ण ठिकानों पर संभावित ड्रोन हमलों की चेतावनी जारी की है। सुरक्षा एजेंसियों को एंटी-ड्रोन तकनीक तैनात करने का निर्देश दिया गया है।
भारत सरकार ने देश के रणनीतिक ठिकानों पर संभावित ड्रोन हमलों को लेकर एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर, केंद्र ने सभी सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों को विशेष रूप से सीमावर्ती और तटीय क्षेत्रों में चौकसी बढ़ाने का निर्देश दिया है। बंदरगाह, जहाज और जलमार्ग मंत्रालय की समुद्री सुरक्षा शाखा ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि दुश्मन तत्व मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) के जरिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकते हैं।
हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय संघर्षों, विशेष रूप से रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों में ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि जमीनी और समुद्री सीमाओं के पास स्थित संपत्तियां सबसे अधिक जोखिम में हैं। इस खतरे से निपटने के लिए सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर 'एंटी-ड्रोन' सिस्टम की तैनाती शुरू कर दी है। ये प्रणालियां न केवल संदिग्ध ड्रोनों का पता लगाने में सक्षम हैं, बल्कि उन्हें हवा में ही जाम करने या नष्ट करने की क्षमता रखती हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन हमलों का खतरा पारंपरिक युद्ध से अलग है क्योंकि इन्हें दूर बैठकर नियंत्रित किया जा सकता है और इन्हें रडार की नजर से बचाना आसान होता है। भारत-पाकिस्तान सीमा और हिंद महासागर क्षेत्र में हालिया गतिविधियों को देखते हुए यह अलर्ट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को भी अपनी सुरक्षा ऑडिट करने और आधुनिक निगरानी तंत्र अपनाने की सलाह दी है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है, क्योंकि भारत की आंतरिक सुरक्षा और तकनीकी प्रगति सीधे तौर पर द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को प्रभावित करती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्वाड (QUAD) के तहत समुद्री सुरक्षा को लेकर गहरा सहयोग है। भारत द्वारा अपनी सीमाओं पर एंटी-ड्रोन तकनीक को मजबूत करना न केवल देश की रक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव किए जा रहे हैं। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित रक्षा प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी को शामिल किया गया है। आने वाले हफ्तों में, महत्वपूर्ण बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों पर सुरक्षा अभ्यास (मॉक ड्रिल) आयोजित किए जाएंगे ताकि आपातकालीन स्थिति में तैयारियों को पुख्ता किया जा सके।
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