राजनीति
भारत हमारा पड़ोसी है, हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए: बांग्लादेशी पीएम के सलाहकार
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 02:01 am

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत के साथ रचनात्मक सहयोग और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत बांग्लादेश का एक अनिवार्य पड़ोसी है और दोनों देशों के लिए साझा विकास, सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। कबीर ने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सम्मान और सहयोग के आधार पर दोनों राष्ट्र दक्षिण एशिया में स्थिरता का नया अध्याय लिख सकते हैं।
एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान कबीर ने स्पष्ट किया कि भूगोल को बदला नहीं जा सकता, इसलिए पड़ोसी होने के नाते दोनों देशों के पास सहयोग के अलावा कोई बेहतर विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों से लोगों के बीच संपर्क (people-to-people ties) ऐसे स्तंभ हैं जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक परिवर्तनों के बाद भारत के साथ संबंधों की भविष्य की दिशा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।
सलाहकार ने रेखांकित किया कि आर्थिक लाभ और सुरक्षा चिंताएं दोनों देशों के लिए समान हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि रेल, सड़क और जलमार्ग कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने से न केवल उत्तर-पूर्वी भारत को लाभ होगा, बल्कि बांग्लादेश के निर्यातकों के लिए भी नए बाजार खुलेंगे। उनके अनुसार, व्यापारिक बाधाओं को दूर करना और सीमा पर बुनियादी ढांचे में सुधार करना दोनों देशों की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि क्षेत्र में गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन के साझा लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय और बांग्लादेशी प्रवासी समुदायों के लिए भी यह घटनाक्रम काफी मायने रखता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में दक्षिण एशियाई समुदाय अक्सर व्यापार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। उपमहाद्वीप में स्थिरता और बेहतर राजनयिक संबंध सीधे तौर पर इन प्रवासियों के व्यापारिक हितों और उनकी गृह भूमि की यात्रा के अनुभवों को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध सकारात्मक बने रहते हैं, तो इसका लाभ वैश्विक स्तर पर फैले दक्षिण एशियाई डायस्पोरा को भी मिलेगा।
अंत में, हुमायूं कबीर ने दोहराया कि मतभेदों के बावजूद, कूटनीति का मुख्य उद्देश्य साझा भविष्य के लिए समाधान खोजना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि साझा इतिहास और संस्कृति के धागे दोनों देशों को जोड़ते हैं, जिसे और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। यह रुख संकेत देता है कि बांग्लादेश की वर्तमान सरकार भारत के साथ एक संतुलित और प्रगतिशील साझेदारी बनाए रखने की इच्छुक है, जो पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य को बदल सकती है।
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