राजनीति
भारत की परमाणु शक्ति में इजाफा: जखीरा बढ़कर 190 हुआ, पहली बार मोर्चे पर तैनात किए 12 हथियार
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 12:01 am
सिपरी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत का परमाणु जखीरा 190 तक पहुंच गया है और देश ने पहली बार 12 परमाणु हथियार सक्रिय तैनाती पर रखे हैं।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की वर्ष 2024-25 की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती सैन्य ताकत को रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के परमाणु हथियारों का भंडार पिछले वर्ष के 180 से बढ़कर अब 190 हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह देखा गया है कि भारत ने अपने इतिहास में पहली बार 12 परमाणु हथियारों को 'ऑपरेशनल अलर्ट' यानी मोर्चे पर तैनात किया है।
सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल तक भारत ने एक भी परमाणु वॉरहेड सक्रिय तैनाती पर नहीं रखा था। लेकिन 2025-26 के रणनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, भारत ने अपनी 'डिटेरेंस' (प्रतिरोध) नीति को मजबूत करते हुए 12 हथियारों को तैयार स्थिति में रखा है। यह कदम क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों, विशेषकर चीन और पाकिस्तान के साथ जारी सीमा विवादों के बीच भारत की रक्षा तैयारियों में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।
सैन्य खर्च के मामले में भी भारत दुनिया के शीर्ष देशों में बना हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में भारत का सैन्य खर्च 92.1 अरब डॉलर रहा, जिससे वह अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के बाद दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा बजट वाला देश बन गया है। भारत का यह निवेश न केवल स्वदेशी रक्षा उत्पादन (आत्मनिर्भर भारत) को बढ़ावा देने के लिए है, बल्कि लंबी दूरी की मिसाइलों और परमाणु त्रय (Nuclear Triad) को आधुनिक बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर रणनीतिक महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और क्वाड (QUAD) गठबंधन के संदर्भ में भारत की मजबूत सैन्य स्थिति हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी परमाणु क्षमताओं को 'न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध' (Minimum Credible Deterrence) की नीति के तहत विकसित कर रहा है, जो किसी भी बाहरी आक्रमण को रोकने के लिए आवश्यक है।
रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि जहां एक ओर भारत अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है, वहीं वैश्विक स्तर पर भी परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण की होड़ बढ़ी है। हालांकि, भारत अपनी 'नो फर्स्ट यूज' (पहले इस्तेमाल न करने) की नीति पर कायम है, लेकिन हथियारों की तैनाती यह दर्शाती है कि देश किसी भी आकस्मिक चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। आगामी वर्षों में भारत की अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों और परमाणु संचालित पनडुब्बियों के बेड़े में विस्तार होने से यह क्षमता और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।
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