टेक्नोलॉजी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की लहर के बीच भारत बना क्वेस्ट ग्लोबल का रणनीतिक सेमीकंडक्टर हब
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:54 am

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के कारण क्वेस्ट ग्लोबल ने भारत को अपने सेमीकंडक्टर विकास के लिए मुख्य केंद्र बनाया है, जिससे देश में नई तकनीकी संभावनाओं के द्वार खुले हैं।
वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में एक बड़े बदलाव के संकेत देते हुए, प्रमुख इंजीनियरिंग सेवा प्रदाता कंपनी 'क्वेस्ट ग्लोबल' ने भारत को अपने सेमीकंडक्टर विकास के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती पैठ और डेटा प्रोसेसिंग की बढ़ती जरूरतों ने वैश्विक स्तर पर चिप निर्माण और डिजाइनिंग की मांग को बढ़ा दिया है, जिसका सीधा लाभ भारत के तकनीकी क्षेत्र को मिल रहा है।
क्वेस्ट ग्लोबल, जो लंबे समय से दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ जुड़ी हुई है, अब भारत में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। कंपनी का मानना है कि भारत न केवल केवल प्रतिभा का स्रोत है, बल्कि अब यह जटिल इंजीनियरिंग सेवाओं के लिए एक परिपक्व पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है। एआई और मशीन लर्निंग के उदय ने सेमीकंडक्टर चिप्स की संरचना को और अधिक जटिल बना दिया है, जिसके लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया के कई स्टार्टअप और स्थापित तकनीकी कंपनियां अब भारतीय इंजीनियरिंग हब के साथ मिलकर काम कर रही हैं। भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का यह विस्तार ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करता है, जो क्रॉस-बॉर्डर तकनीकी हस्तांतरण और निवेश में रुचि रखते हैं।
क्वेस्ट ग्लोबल की रणनीति के केंद्र में 'एंड-टू-एंड' इंजीनियरिंग सेवाएं हैं। इसका अर्थ है कि चिप के शुरुआती डिजाइन से लेकर उसके अंतिम उत्पादन और सत्यापन तक की प्रक्रिया में भारत की बड़ी भूमिका होगी। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार की 'सेमीकंडक्टर मिशन' जैसी पहल और पीएलआई (PLI) योजनाओं ने वैश्विक कंपनियों का भरोसा जीता है। एआई के दौर में, जहां हर उपकरण को स्मार्ट बनाने की होड़ लगी है, वहां क्वेस्ट ग्लोबल जैसी कंपनियों का भारत पर ध्यान केंद्रित करना देश को 'चिप डिजाइनिंग' के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करता है।
निष्कर्षतः, भारत अब केवल बैक-एंड सेवाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वह सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से—इंजीनियरिंग और नवाचार—का नेतृत्व कर रहा है। आने वाले वर्षों में, इस क्षेत्र में होने वाला विकास न केवल भारत की जीडीपी में योगदान देगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को और अधिक सुरक्षित और अनिवार्य बना देगा।
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