राजनीति
INDIA गठबंधन में बड़ी दरार: टीएमसी और डीएमके के रुख से विपक्षी एकता पर संकट
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 10:00 am
ममता बनर्जी की टीएमसी और स्टालिन की डीएमके के हालिया रुख ने विपक्षी INDIA गठबंधन की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनावों से पहले भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (INDIA) इस समय अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। गठबंधन के दो सबसे मजबूत स्तंभ—पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)—के साथ संबंधों में आई खटास ने विपक्षी एकता के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि गठबंधन अब 'रीसेट' मोड में है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पार्टी बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। ताजा घटनाक्रमों के अनुसार, सीट बंटवारे और स्थानीय राजनीति के अंतर्विरोधों के कारण गठबंधन की संरचना कमजोर होती दिख रही है। तमिलनाडु में भी डीएमके के रुख ने कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है। हालांकि डीएमके ने औपचारिक रूप से गठबंधन नहीं छोड़ा है, लेकिन वैचारिक और रणनीतिक मतभेद गहरे होते जा रहे हैं।
इस राजनीतिक उथल-पुथल का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के बीच भी इसे लेकर काफी चर्चा है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय, जो भारत की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं, इस घटनाक्रम को एक अस्थिर विपक्ष के रूप में देख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय दल अपने व्यक्तिगत हितों को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रखेंगे, तो सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विकल्प पेश करना मुश्किल होगा।
कांग्रेस नेतृत्व अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं का प्रयास है कि क्षेत्रीय दलों की नाराजगी दूर की जाए और एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम के आधार पर फिर से एकजुटता दिखाई जाए। हालांकि, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि वे अपनी शर्तों पर ही समझौता करने को तैयार हैं।
INDIA गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह मतदाताओं को एक विश्वसनीय और स्थिर विकल्प के रूप में कैसे पेश करे। मौजूदा परिस्थितियों में, जहां मुख्य घटक दल ही एक-दूसरे से दूर जा रहे हैं, गठबंधन की भविष्य की राह बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। अगले कुछ सप्ताह विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।
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