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विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की आज अहम बैठक: डीएमके ने बनाई दूरी, ममता की तृणमूल भी बैकफुट पर
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 11:30 pm

विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की आज दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक हो रही है, लेकिन डीएमके और तृणमूल कांग्रेस की अनुपस्थिति ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय राजनीति में विपक्षी एकता की धुरी माने जाने वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली में आयोजित होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक का उद्देश्य भविष्य की राजनीतिक रूपरेखा और चुनावी रणनीति तैयार करना है। हालांकि, बैठक शुरू होने से पहले ही गठबंधन की दरारें उभरकर सामने आ गई हैं। दक्षिण भारत में कांग्रेस के सबसे मजबूत सहयोगी माने जाने वाले एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके (DMK) ने इस बैठक से दूरी बना ली है, जिससे विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है।
डीएमके ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगी। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी का यह रुख ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के बीच समन्वय को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। केवल डीएमके ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) का रुख भी कुछ समय से गठबंधन के प्रति ठंडा रहा है। इन प्रमुख क्षेत्रीय दिग्गजों की अनुपस्थिति या उदासीनता ने 'इंडिया' ब्लॉक की उस संकल्पना पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसका उद्देश्य केंद्र की सत्ता से भाजपा को बेदखल करना था।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भारत की यह राजनीतिक उथल-पुथल काफी मायने रखती है। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में एक स्थिर और मजबूत लोकतंत्र की उम्मीद करते हैं, क्योंकि भारत की आंतरिक स्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेशी निवेश पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय मूल के लोग, जो भारत की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं, इस घटनाक्रम को विपक्षी गठबंधन की विफलता के संकेत के रूप में देख रहे हैं। यदि मुख्य क्षेत्रीय दल साथ नहीं आते हैं, तो आगामी चुनावों में भाजपा के सामने कोई ठोस चुनौती पेश करना मुश्किल होगा।
बैठक के एजेंडे में सीट-बंटवारे के विवादों को सुलझाना और एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम (Common Minimum Programme) तैयार करना शामिल है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी इस कोशिश में जुटे हैं कि बचे हुए सहयोगियों को एकजुट रखा जाए। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आज की बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो गठबंधन के बिखरने का खतरा और बढ़ जाएगा।
फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शरद पवार, उद्धव ठाकरे और वामपंथी दलों जैसे अन्य महत्वपूर्ण नेता इस संकट का क्या समाधान निकालते हैं। क्या कांग्रेस अपने सहयोगियों का विश्वास फिर से जीत पाएगी या 'इंडिया' गठबंधन महज एक विचार बनकर रह जाएगा, इसका फैसला आज की चर्चाओं से तय होगा।
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