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भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल समझौता; रणनीतिक साझेदारी के 'स्वर्ण युग' की शुरुआत
ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 04:31 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल सौदों सहित आठ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो रक्षा और तकनीक में नए युग का संकेत हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया की आधिकारिक राजकीय यात्रा ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। इस यात्रा के दौरान रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में आठ से अधिक महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में सबसे प्रमुख आकर्षण लंबे समय से प्रतीक्षित ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल सौदा रहा, जिसने इंडोनेशिया को भारत के विस्तार पाते रक्षा निर्यात और तटीय सुरक्षा रणनीति में एक अनिवार्य भागीदार के रूप में स्थापित कर दिया है।
जकार्ता में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद दोनों नेताओं ने साझा प्रेस वक्तव्य में इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता केवल हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का आधार है। ब्रह्मोस मिसाइल, जो अपनी श्रेणी में दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, इंडोनेशिया की समुद्री रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। इसके साथ ही, हवा से हवा में मार करने वाली 'अस्त्र' मिसाइल का सौदा भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती वैश्विक साख को दर्शाता है।
रक्षा के अलावा, दोनों देशों ने डिजिटल भुगतान प्रणाली, अंतरिक्ष सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच चिकित्सा पर्यटन और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। शिक्षा के क्षेत्र में, भारतीय संस्थानों और इंडोनेशियाई विश्वविद्यालयों के बीच छात्र विनिमय कार्यक्रमों और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए नए मार्ग खोले गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया न केवल भौगोलिक रूप से निकट हैं, बल्कि उनके लोकतांत्रिक मूल्य और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण भी एक समान हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होते संबंध क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऑस्ट्रेलिया, जो पहले से ही भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है, के लिए इन दो बड़ी एशियाई शक्तियों का करीब आना एक सुरक्षित और मुक्त व्यापार मार्ग सुनिश्चित करने में सहायक होगा। हिंद महासागर में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच, भारत का अपने पड़ोसियों के साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना एक सकारात्मक संदेश देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'स्वर्ण अध्याय' दक्षिण-पूर्वी एशिया में भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। आगामी वर्षों में, इन समझौतों का असर न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि व्यापारिक और आर्थिक मोर्चे पर भी देखने को मिलेगा, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के नए रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है।
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