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भारत और चीन सीमा विवाद सुलझाने पर सहमत; राजनयिक और सैन्य स्तर पर बातचीत जारी रखने का निर्णय
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 07:37 pm

भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने और लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का सक्रिय उपयोग करने पर सहमति जताई है।
भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दोनों देशों ने राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से बातचीत जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है। नई दिल्ली में आयोजित 'भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र' (WMCC) की 31वीं बैठक में इस निर्णय पर मुहर लगाई गई। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति को स्थिर करने और शेष बचे मुद्दों को शीघ्रता से हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बैठक के दौरान, भारतीय और चीनी प्रतिनिधियों ने मौजूदा तंत्रों जैसे कि WMCC और स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसका मुख्य उद्देश्य सीमा पर किसी भी प्रकार की गलतफहमी या गलत गणना (miscalculation) से बचना है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच हुई यह चर्चा सकारात्मक रही और इसमें द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। भारत और चीन के बीच क्षेत्रीय स्थिरता न केवल दक्षिण एशिया, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया, जो क्वाड (QUAD) का एक प्रमुख सदस्य है, इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन और शांतिपूर्ण कूटनीति का पक्षधर रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए, भारत की सीमाओं पर तनाव कम होना एक राहत की खबर है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भारत की आर्थिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करता है।
गौरतलब है कि 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। हालांकि, हाल के महीनों में कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ताओं ने विश्वास बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए एक आवश्यक पूर्व शर्त है। आने वाले समय में, उच्च स्तरीय सैन्य वार्ताओं के अगले दौर की भी संभावना जताई जा रही है, जिसमें हॉट स्प्रिंग्स और डेपसांग जैसे क्षेत्रों से जुड़े लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
निष्कर्ष के तौर पर, भारत और चीन का यह कदम दर्शाता है कि दोनों देश कूटनीतिक रास्तों के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान खोजने के प्रति इच्छुक हैं। ICN24 की रिपोर्ट के अनुसार, इस संवाद का जारी रहना न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों के लिए, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक स्थिति के लिए भी सकारात्मक संकेत है।
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