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भारत और बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बढ़ाने पर सहमत: घुसपैठ रोकने के लिए होगी साझा गश्त
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 06:01 pm

नई दिल्ली में चार दिवसीय बैठक के बाद भारत और बांग्लादेश ने सीमा पर अपराधों और अवैध प्रवास को रोकने के लिए समन्वित गश्त और खुफिया जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है।
नई दिल्ली में संपन्न हुई चार दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक में भारत और बांग्लादेश ने सीमा प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण सहमति व्यक्त की है। दोनों देशों के सुरक्षा बलों ने सीमा पार अपराधों को रोकने और अवैध प्रवास की चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित गश्त (Coordinated Patrols) और वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर दिया है। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब सीमा पर प्रवासियों के कथित 'पुश-इन' और घुसपैठ को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) के बीच हुई इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और तस्करी व अन्य अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। हाल के महीनों में बांग्लादेश ने भारत पर बिना वैध दस्तावेजों के लोगों को सीमा पार धकेलने के आरोप लगाए थे, जबकि भारत ने अपनी सुरक्षा चिंताओं और अवैध घुसपैठ पर बार-बार आपत्ति जताई है। नई रणनीति के तहत, दोनों देशों की सेनाएं संवेदनशील इलाकों की पहचान करेंगी और वहां संयुक्त निगरानी बढ़ाई जाएगी।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने मानव तस्करी और मवेशियों की तस्करी जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीमा पर बाड़ लगाना और तकनीकी निगरानी को मजबूत करना किसी भी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। वहीं, बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल ने सीमा पर होने वाली मौतों पर चिंता व्यक्त की, जिस पर भारतीय पक्ष ने आश्वासन दिया कि वे 'गैर-घातक हथियारों' (Non-lethal weapons) के उपयोग की नीति पर कायम हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। भारत की बाहरी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सीधे तौर पर भारत की वैश्विक छवि और प्रवासी भारतीयों के हितों को प्रभावित करती है। ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ा बंगाली भाषी समुदाय है, जिसमें पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश दोनों मूल के लोग शामिल हैं। दक्षिण एशिया में सीमा विवादों का समाधान न केवल क्षेत्रीय शांति सुनिश्चित करता है, बल्कि प्रवासी समुदायों के भीतर सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सीमा पर बेहतर समन्वय से भविष्य में द्विपक्षीय व्यापार और लोगों के बीच संपर्क (People-to-people ties) में सुधार होगा।
निष्कर्षतः, भारत और बांग्लादेश के बीच यह नई सुरक्षा व्यवस्था विवादों को कम करने और एक सुरक्षित सीमा तंत्र विकसित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर यह समन्वय कितना प्रभावी साबित होता है और क्या इससे सीमा पर होने वाली हिंसक घटनाओं में कमी आती है।
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