राजनीति
विपक्षी गठबंधन की महाबैठक: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और सीजेआई को पत्र लिखने पर बनी सहमति
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 07:00 am
विपक्षी गठबंधन की बैठक में नीट परीक्षा विवाद पर चर्चा हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को विपक्षी गठबंधन 'आईएनडीआईए' (INDIA) के घटक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में 22 प्रमुख दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा हालिया चुनाव परिणामों के बाद की रणनीतिक दिशा और देश में चल रहे ज्वलंत मुद्दों, विशेष रूप से नीट (NEET-UG) परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर चर्चा करना था।
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि गठबंधन देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध तेज करेगा। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि परीक्षाओं के संचालन में हुई चूक ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है, और इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए। गठबंधन ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक औपचारिक पत्र लिखने का भी निर्णय लिया है।
विपक्षी खेमे की इस हलचल का असर विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय प्रवासियों पर भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई भारतीय परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए भारत के मेडिकल संस्थानों की ओर रुख करते हैं। परीक्षा प्रणाली में इस तरह की अस्थिरता और राजनीतिक टकराव प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह भारत की वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के बाद कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की शुचिता का सवाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष संसद के आगामी सत्र में सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह एकजुट है। गठबंधन ने यह भी तय किया है कि वे पेपर लीक के मामलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर देशभर में जन-आंदोलन छेड़ेंगे।
इस बैठक में राहुल गांधी, शरद पवार, एम.के. स्टालिन और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने यह संदेश दिया है कि लोकसभा चुनाव के बाद भी गठबंधन की एकजुटता बरकरार है। विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष अब रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रुख अपना रहा है, जिससे आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति में टकराव और बढ़ने की संभावना है।
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