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अमेरिका में एक पूजा की दक्षिणा कितनी? सोशल मीडिया पर पंडितों की कमाई देख भारतीय हैरान

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 12:30 am
अमेरिका में एक पूजा की दक्षिणा कितनी? सोशल मीडिया पर पंडितों की कमाई देख भारतीय हैरान

अमेरिका में सत्यनारायण कथा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पंडितों की फीस का खुलासा करने वाले एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

विदेशों में बसे भारतीय समुदायों के लिए अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को संजोए रखना एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन हाल ही में अमेरिका से आए एक वीडियो ने इस श्रद्धा के आर्थिक पहलू पर सबका ध्यान खींचा है। अमेरिका में रह रही एक भारतीय महिला द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में बताया गया है कि वहां एक साधारण पूजा के लिए पंडितों को दी जाने वाली दक्षिणा भारत के मुकाबले कहीं अधिक है। इस खुलासे ने सोशल मीडिया पर भारतीयों, विशेषकर प्रवासी समुदायों के बीच एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। वीडियो के अनुसार, अमेरिका में एक सामान्य 'सत्यनारायण पूजा' संपन्न कराने के लिए पंडितों की फीस लगभग 300 से 350 डॉलर (करीब 25,000 से 30,000 रुपये) के बीच होती है। यह राशि केवल मुख्य पूजा की है; यदि इसमें यात्रा व्यय और अन्य सामग्रियों को जोड़ दिया जाए, तो खर्च काफी बढ़ जाता है। वीडियो में बताया गया है कि गृह प्रवेश या बड़े यज्ञों के लिए यह दक्षिणा 500 से 1,000 डॉलर तक भी जा सकती है। भारतीय दर्शकों के लिए ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं, क्योंकि भारत में समान सेवाओं के लिए दक्षिणा का पैमाना पूरी तरह अलग है। इस वायरल चर्चा ने न केवल आर्थिक बल्कि आप्रवासन (Immigration) के पहलुओं को भी उजागर किया है। अमेरिका में धार्मिक कार्यों के लिए पंडितों को विशेष रूप से 'R-1 वीजा' पर बुलाया जाता है। यह एक गैर-आप्रवासी वीजा है जो धार्मिक कार्यकर्ताओं को अस्थायी रूप से अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है। इस प्रक्रिया में शामिल कानूनी पेचीदगियां, प्रायोजन (Sponsorship) की लागत और अमेरिका में रहने का उच्च खर्च, इन ऊंची फीस के पीछे के मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह विषय काफी प्रासंगिक है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भी धार्मिक अनुष्ठानों की मांग बढ़ने के साथ-साथ पंडितों की उपलब्धता और उनकी फीस पर चर्चा होती रहती है। ऑस्ट्रेलिया में भी पंडितों को अक्सर 'सबक्लास 408' (Religous Work) जैसे वीजा के तहत बुलाया जाता है। यहाँ भी एक मानक पूजा के लिए 250 से 500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक की दक्षिणा ली जाती है, जो वहां के 'कॉस्ट ऑफ लिविंग' और प्रोफेशनल सर्विस रेट्स के अनुरूप है। सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पंडितों को भी एक पेशेवर सेवा प्रदाता की तरह देखा जाना चाहिए, जिन्हें विदेश में महंगे किराए और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाना पड़ता है। वहीं, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि अत्यधिक व्यावसायिकता के कारण आम मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अपनी परंपराओं का निर्वाह करना मुश्किल होता जा रहा है। कुल मिलाकर, यह वीडियो प्रवासी भारतीयों के जीवन के उस यथार्थ को दर्शाता है जहाँ आस्था और अर्थव्यवस्था का सीधा टकराव होता है।
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