राजनीति
संसद में विपक्ष को मिले बोलने का मौका, तभी सत्र होगा सफल: शशि थरूर
ICN24 Newsroom 17 जुल॰ 2026, 04:32 am

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि आगामी संसद सत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार विपक्ष को महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखने की अनुमति देती है या नहीं।
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने आगामी संसद सत्र के सुचारू संचालन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। थरूर ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए विपक्ष को अपनी बात रखने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस करने का पर्याप्त समय देती है, तो संसद का आगामी सत्र काफी फलदायी हो सकता है। उनके अनुसार, संसद की कार्यवाही में गतिरोध केवल तभी उत्पन्न होता है जब विपक्षी स्वर को दबाने का प्रयास किया जाता है।
थरूर ने उन प्रमुख मुद्दों को भी रेखांकित किया जो इस बार विपक्ष के एजेंडे में शीर्ष पर रहने वाले हैं। उन्होंने विशेष रूप से 'नीट' (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और विवादों का जिक्र किया, जिसने देश भर के लाखों छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। थरूर का मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय चिंता का विषय है जिस पर सदन में विस्तृत चर्चा अनिवार्य है। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (One Nation, One Election) जैसे संभावित संवैधानिक संशोधनों पर भी ध्यान आकर्षित किया।
हाल के लोकसभा चुनावों के बाद संसद के भीतर बदले हुए समीकरणों पर चर्चा करते हुए थरूर ने संकेत दिया कि इस बार विपक्ष अधिक मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत चर्चा और असहमति में निहित है। यदि सरकार हठधर्मिता छोड़कर विपक्ष के सुझावों और सवालों का स्वागत करती है, तो कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को बिना किसी हंगामे के पूरा किया जा सकता है। थरूर ने जोर देकर कहा कि जिम्मेदारी केवल विपक्ष की नहीं बल्कि सत्ता पक्ष की भी है कि वे सदन को एक सार्थक मंच के रूप में उपयोग करें।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भारत की संसदीय हलचल विशेष महत्व रखती है। शिक्षा नीति और 'नीट' जैसे मुद्दों का प्रभाव सीधे तौर पर उन प्रवासी परिवारों पर पड़ता है जिनके बच्चे भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की योजना बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त, संवैधानिक संशोधनों जैसे बड़े राजनीतिक बदलाव भारत की लोकतांत्रिक छवि और स्थिरता को वैश्विक स्तर पर प्रभावित करते हैं, जो ऑस्ट्रेलिया-भारत द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष के तौर पर, शशि थरूर ने उम्मीद जताई कि सरकार इस बार पुरानी गलतियों को नहीं दोहराएगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर समझौता नहीं करेगा, लेकिन रचनात्मक बहस के लिए हमेशा तैयार है। अब सबकी निगाहें लोकसभा और राज्यसभा के आगामी सत्र पर टिकी हैं कि क्या इस बार वास्तव में देश के बुनियादी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो पाएगी या सत्र फिर से हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा।
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