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गीग इकोनॉमी में ऐतिहासिक बदलाव: आईएलओ ने अपनाया कन्वेंशन 193, तेलंगाना गिग वर्कर्स यूनियन ने किया स्वागत

ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 03:01 am
गीग इकोनॉमी में ऐतिहासिक बदलाव: आईएलओ ने अपनाया कन्वेंशन 193, तेलंगाना गिग वर्कर्स यूनियन ने किया स्वागत

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने प्लेटफॉर्म वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा के लिए दुनिया का पहला वैश्विक मानक 'कन्वेंशन 193' अपनाया है, जिसका भारतीय यूनियनों ने स्वागत किया।

हैदराबाद/जेनेवा: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने 'डिजिटल प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में गरिमापूर्ण कार्य' पर कन्वेंशन 2026 (संख्या 193) को अपनाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह प्लेटफॉर्म श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया दुनिया का पहला वैश्विक श्रम मानक है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे दुनिया भर के लाखों गिग वर्कर्स की जीत बताया है। इंटरनेशनल लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) द्वारा लिया गया यह निर्णय एक दशक से अधिक समय तक श्रमिकों, यूनियनों, शिक्षाविदों और सरकारों द्वारा किए गए निरंतर संघर्ष और अनुसंधान का परिणाम है। यह कन्वेंशन स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है कि भोजन वितरण (फूड डिलीवरी), परिवहन, सफाई, देखभाल (केयर वर्क) और कंटेंट मॉडरेशन जैसे प्लेटफॉर्म-आधारित कार्यों में लगे लोग 'श्रमिक' हैं, चाहे उनके काम को किसी भी नाम से पुकारा जाए। शेख सलाउद्दीन, जो साउथ एशिया के लिए इंटरनेशनल अलायंस ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IAATW) के उपाध्यक्ष भी हैं, ने कहा, "लंबे समय तक कंपनियों ने श्रम सुरक्षा से बचने के लिए प्लेटफॉर्म वर्क को 'गिग्स', 'टास्क' या 'राइड्स' जैसे नामों का इस्तेमाल किया। आज वह स्थिति बदल गई है। यह कन्वेंशन हर उस डिलीवरी वर्कर, राइड-हेलिंग ड्राइवर और केयर वर्कर का है जिसने अदृश्य रहने से इनकार कर दिया।" इस कन्वेंशन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक 'एल्गोरिथमिक प्रबंधन' पर नियंत्रण है। यह स्वचालित प्रबंधन प्रणालियों को विनियमित करने वाला पहला वैश्विक मानक है। अब श्रमिकों को स्वचालित निर्णयों के लिखित स्पष्टीकरण और मानवीय समीक्षा का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा, यह सदस्य देशों को कार्यस्थल पर चोटों, बीमारियों, और हिंसा या उत्पीड़न (ऑनलाइन दुरुपयोग सहित) को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश देता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह खबर अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और पेशेवर उबर, डोरडैश और मेन्यूलॉग जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हैं। कन्वेंशन 193 विशेष रूप से प्रवासी और शरणार्थी श्रमिकों के लिए सुरक्षा की मांग करता है और निष्पक्ष विवाद समाधान की गारंटी देता है। यह व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और बिना किसी ठोस कारण के अकाउंट निलंबन पर रोक लगाने की भी वकालत करता है। भारत जैसे विशाल गिग अर्थव्यवस्था वाले देश में इस कन्वेंशन का प्रभाव गहरा होगा। शेख सलाउद्दीन ने भारत सरकार और अन्य देशों से इस मानक को जल्द से जल्द लागू करने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी नवाचार श्रमिकों के अधिकारों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। अब दुनिया भर के श्रमिक समूह सरकारों पर इस कन्वेंशन की पुष्टि करने और स्थानीय कानूनों को इसके अनुरूप अपडेट करने के लिए दबाव डालेंगे।
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