राजनीति
ऐतिहासिक क्षण: राष्ट्रपति मुर्मू ने आईएमए पासिंग आउट परेड में पहली महिला कैडेट्स को सेना में शामिल किया
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 11:01 pm

देहरादून में आयोजित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) की पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहली बार महिला कैडेटों को भारतीय सेना में शामिल कर एक नया इतिहास रचा।
भारत के सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में आयोजित पासिंग आउट परेड (POP) की समीक्षा की। इस वर्ष की परेड विशेष रूप से ऐतिहासिक रही, क्योंकि इसमें पहली बार महिला कैडेटों को आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना में कमीशन प्रदान किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए इसे भारत की 'नारी शक्ति' और महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि महिला कैडेटों का यह पहला बैच देश की उन करोड़ों युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जो सशस्त्र बलों में शामिल होकर राष्ट्र की सेवा करने का सपना देखती हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव न केवल सेना की समावेशी संस्कृति को दर्शाता है, बल्कि समाज में महिलाओं की बदलती और मजबूत होती भूमिका का भी प्रतीक है। राष्ट्रपति मुर्मू ने जोर देकर कहा कि आज की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी योग्यता सिद्ध कर रही हैं और अब युद्ध के मैदान में भी वे अपने पराक्रम का प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।
देहरादून के विख्यात 'चेटवुड हॉल' के सामने आयोजित इस भव्य समारोह में कुल 300 से अधिक कैडेट्स ने अंतिम पग पार किया। इनमें न केवल भारतीय राज्यों के युवा शामिल थे, बल्कि मित्र देशों के विदेशी कैडेट्स ने भी अपनी ट्रेनिंग पूरी की। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह गर्व का विषय है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया-भारत रक्षा संबंधों में भी लैंगिक समानता और संयुक्त सैन्य अभ्यास पर हाल के वर्षों में काफी जोर दिया गया है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपने बच्चों को भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास और गौरव से जोड़कर देखते हैं।
राष्ट्रपति ने कैडेट्स को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने साइबर युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाइब्रिड वॉरफेयर जैसे नए खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य के सैन्य अधिकारियों को तकनीकी रूप से कुशल और मानसिक रूप से मजबूत होना होगा। उन्होंने पास आउट हुए अधिकारियों से आह्वान किया कि वे भारतीय सेना की मर्यादा, निष्ठा और 'सेवा परमो धर्म:' के आदर्श वाक्य को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखें।
इस समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। पहली महिला कैडेट्स के चेहरे पर गर्व और संकल्प की झलक साफ देखी जा सकती थी। इस उपलब्धि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की रक्षा पंक्ति में अब जेंडर की बाधाएं पूरी तरह से समाप्त हो रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की छवि एक आधुनिक और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में और सुदृढ़ हुई है।
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