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हिंदुत्व का विश्वदृष्टिकोण ही वैश्विक शांति का आधार: मुंगेर में बोले आरएसएस सह-सरकार्यवाह आलोक कुमार
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 03:01 pm

आरएसएस सह-सरकार्यवाह आलोक कुमार ने कहा कि पूंजीवाद और आतंकवाद से जूझ रही दुनिया के लिए भारतीय विचार और हिंदुत्व ही शांति का एकमात्र मार्ग है।
मुंगेर, बिहार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह-सरकार्यवाह आलोक कुमार ने वैश्विक संघर्षों और अस्थिरता के बीच भारतीय दर्शन की प्रासंगिकता पर जोर दिया है। मुंगेर के सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित 'कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम' के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में दुनिया पूंजीवाद, आतंकवाद और प्रभुत्व की होड़ से उत्पन्न संघर्षों से त्रस्त है। ऐसे समय में केवल हिंदुत्व का विश्वदृष्टिकोण ही मानवता की रक्षा और वैश्विक शांति का आधार बन सकता है।
आलोक कुमार ने कहा कि भारत को अपनी सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और मानवीय मूल्यों पर अडिग रहते हुए विश्व पटल पर एक शक्तिशाली भूमिका निभानी होगी। उन्होंने वेदों का संदर्भ देते हुए बताया कि प्राचीन काल में भी देवताओं ने राक्षसी शक्तियों का सामना करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य किया था। संघ का प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति अनुशासन, समर्पण और जिम्मेदारी की भावना जगाने का माध्यम है।
ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण है, क्योंकि आरएसएस अब अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 'पंच परिवर्तन' के विचार को वैश्विक स्तर पर ले जा रहा है। आलोक कुमार ने बताया कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्वबोध (स्वत्व का जागरण) और नागरिक कर्तव्य ही वे पांच स्तंभ हैं, जिनसे समाज में सार्थक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे इन मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाएं ताकि भारत माता का गौरव विश्व भर में स्थापित हो सके।
समारोह के मुख्य अतिथि और प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार ने स्वयंसेवकों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा में लगे कार्यकर्ता समाज को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने मुंगेर की ऐतिहासिक धरती पर इस प्रशिक्षण वर्ग के आयोजन को गर्व का विषय बताया। इस 20 दिवसीय शिविर में बिहार और झारखंड के कुल 126 शिक्षार्थियों ने भाग लिया, जबकि दक्षिण बिहार के संघ शिक्षा वर्ग और घोष वर्ग में 229 प्रतिभागी शामिल हुए।
आलोक कुमार ने अंत में कहा कि भारतीय विचारों और परंपराओं की स्वीकार्यता पूरी दुनिया में बढ़ रही है। संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाना और भारत को एक सक्षम और सशक्त राष्ट्र के रूप में पुनः स्थापित करना है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक समाज में 'स्व' का भाव जागृत नहीं होगा, तब तक व्यवस्थागत परिवर्तन संभव नहीं है।
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