राजनीति
हिमाचल प्रदेश: मुख्यमंत्री सुक्खू का पंचायत प्रतिनिधियों को आह्वान, नशामुक्त और विकसित गांवों का करें निर्माण
ICN24 Newsroom 16 जून 2026, 01:01 am

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पंचायत प्रतिनिधियों से 'चिट्टा' के खिलाफ अभियान छेड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आग्रह किया है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए राज्य के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। शिमला में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर के नेताओं से अपील की कि वे न केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित रहें, बल्कि समाज की कुरीतियों, विशेष रूप से नशे के बढ़ते प्रसार के खिलाफ एक निर्णायक जंग लड़ें।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के युवाओं के बीच बढ़ते नशीले पदार्थों, विशेषकर 'चिट्टा' (हेरोइन) के सेवन पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में युवाओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें और नशे के सौदागरों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार जैसा कड़ा रुख अपनाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पुलिस तंत्र को मजबूत कर रही है, लेकिन बिना सामुदायिक भागीदारी के नशे की इस चेन को तोड़ना असंभव है। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ें।
ग्रामीण विकास को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए, सीएम सुक्खू ने कहा कि पंचायतों को अपनी आय के स्रोत स्वयं विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक तभी पहुंच सकती हैं जब पंचायतें पारदर्शी और सक्रिय हों। उन्होंने महिला प्रतिनिधियों की बढ़ती संख्या की प्रशंसा की और उन्हें शासन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।
हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार कृषि और बागवानी है। मुख्यमंत्री ने पंचायतों से आग्रह किया कि वे जैविक खेती और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत ही प्रदेश की असली शक्ति है और जब गांव समृद्ध होंगे, तभी हिमाचल प्रदेश 2032 तक आत्मनिर्भर राज्य बनने का लक्ष्य प्राप्त कर सकेगा।
यह संबोधन न केवल प्रशासनिक दिशा-निर्देश था, बल्कि राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने का एक रोडमैप भी था। मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार विकास कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं होने देगी, बशर्ते कार्य योजनाएं प्रभावशाली और जनहित में हों। नशे के विरुद्ध यह आह्वान राज्य की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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