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हजारीबाग पुलिस की त्वरित कार्रवाई: ओडिशा के झारसुगुड़ा में सुरक्षित मिले दो लापता बच्चे
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 02:36 am

हजारीबाग के दारू थाना क्षेत्र से लापता हुए दो बच्चों को पुलिस ने तकनीकी जांच की मदद से ओडिशा के झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया है।
झारखंड के हजारीबाग जिले की पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। जिले के दारू थाना क्षेत्र अंतर्गत लोहड़ी गांव से अचानक लापता हुए दो बच्चों को पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर पड़ोसी राज्य ओडिशा के झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया है। यह कार्रवाई पुलिस की तकनीकी दक्षता और त्वरित प्रतिक्रिया का परिणाम मानी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोहड़ी गांव के रहने वाले दो बच्चे शनिवार को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब बच्चों का कहीं पता नहीं चला, तो उन्होंने तुरंत दारू थाना में इसकी सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया।
दारू थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने तुरंत छानबीन शुरू की। इस दौरान पुलिस की तकनीकी शाखा (Technical Cell) ने बच्चों की लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया। वैज्ञानिक साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस को पता चला कि बच्चे किसी ट्रेन के माध्यम से ओडिशा की ओर जा रहे हैं। पुलिस ने बिना समय गंवाए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और झारसुगुड़ा पुलिस से संपर्क साधा।
झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन पर की गई घेराबंदी के दौरान दोनों बच्चों को सुरक्षित पहचान लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बच्चों को फिलहाल झारसुगुड़ा में ही सुरक्षित रखा गया था, जिसके बाद हजारीबाग पुलिस की एक टीम उन्हें वापस लाने के लिए रवाना हुई। थाना प्रभारी ने कहा कि तकनीकी जांच और समय पर मिली जानकारी ने इस ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस घटना के बाद लोहड़ी गांव और पूरे हजारीबाग क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतनी जल्दी बच्चों का मिल जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि बच्चे खुद वहां तक कैसे पहुंचे या इसके पीछे किसी गिरोह का हाथ है।
ICN24 के माध्यम से हम अपने पाठकों, विशेषकर प्रवासी भारतीय समुदाय को यह बताना चाहते हैं कि भारत में अब पुलिस प्रशासन आधुनिक तकनीक और अंतर-राज्यीय समन्वय का बेहतर उपयोग कर रहा है। बच्चों की सुरक्षा के प्रति पुलिस की यह संवेदनशीलता समाज में विश्वास पैदा करती है।
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