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हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने केंद्रीय ऊर्जा सचिव से की मुलाकात; एनटीपीसी विस्थापितों के लिए मांगा न्याय
ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 12:35 am

हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल से मुलाकात कर एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग की।
हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल से एक महत्वपूर्ण शिष्टाचार मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली एनटीपीसी (NTPC) की विभिन्न कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों और विस्थापित परिवारों की लंबे समय से लंबित समस्याओं को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखना था। सांसद ने सचिव को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा, जिसमें स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा करने और उन्हें न्याय दिलाने की पुरजोर अपील की गई।
बैठक के दौरान मनीष जायसवाल ने रेखांकित किया कि हजारीबाग जिले के बड़कागांव और केरेडारी जैसे क्षेत्रों में एनटीपीसी की खनन गतिविधियों के कारण हजारों परिवारों को अपनी पैतृक भूमि से हाथ धोना पड़ा है। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों का योगदान सर्वोपरि है, लेकिन इसके बदले में उन्हें जो मुआवजा और पुनर्वास सुविधाएं मिलनी चाहिए, उनमें भारी विसंगतियां हैं। सांसद ने ऊर्जा सचिव को बताया कि विस्थापित परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं, रोजगार और उचित सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सांसद ने विशेष रूप से 'लैंड लूजर' (भूमि गंवाने वाले) परिवारों को स्थायी रोजगार देने की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल नकद मुआवजा देना काफी नहीं है, बल्कि उन परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कौशल विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करना एनटीपीसी की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। इसके अलावा, उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत बेहतर स्कूल, अस्पताल और सड़कों के निर्माण की मांग भी दोहराई।
केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने सांसद की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि विभाग इन मुद्दों की समीक्षा करेगा। सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से होने वाला औद्योगिक विकास समावेशी हो और किसी भी नागरिक के अधिकारों का हनन न हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की बात कही ताकि विस्थापितों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान निकाला जा सके।
झारखंड का हजारीबाग क्षेत्र खनिज संपदा से धनी होने के बावजूद विस्थापन और पलायन की मार झेलता रहा है। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय, विशेषकर वे जो झारखंड मूल के हैं, अक्सर इन विकास परियोजनाओं के सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। मनीष जायसवाल की इस पहल को क्षेत्र में विस्थापितों के आंदोलन को एक नई ऊर्जा देने के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि केंद्र स्तर पर इन मांगों पर ठोस कार्रवाई होती है, तो यह वर्षों से अन्याय सह रहे परिवारों के लिए एक बड़ी जीत होगी।
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