राजनीति
हरियाणा: ग्रुप ए और बी अधिकारियों के सेवा मामलों में विजिलेंस क्लियरेंस अनिवार्य, मुख्य सचिव ने जारी किए कड़े निर्देश
ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 01:31 am

हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्रुप ए और बी अधिकारियों के सेवा मामलों में विजिलेंस क्लियरेंस को अनिवार्य कर दिया है।
हरियाणा सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने अब ग्रुप ए और बी श्रेणी के अधिकारियों के सेवा संबंधी विभिन्न मामलों में विजिलेंस क्लियरेंस (सतर्कता अनापत्ति) प्राप्त करने के लिए एक नई और मानकीकृत व्यवस्था लागू की है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी किए गए इन निर्देशों का उद्देश्य सभी सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को समयबद्ध और एकसमान बनाना है।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति (deputation), और अन्य महत्वपूर्ण सेवा लाभों के लिए विजिलेंस क्लियरेंस अनिवार्य होगी। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि यह कदम व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के बाद उठाया गया है ताकि प्रक्रियागत देरी को कम किया जा सके। अक्सर यह देखा गया है कि स्पष्ट दिशानिर्देशों के अभाव में विजिलेंस रिपोर्ट प्राप्त करने में लंबा समय लगता था, जिससे अधिकारियों के जायज सेवा लाभों में देरी होती थी। अब एक मानकीकृत पोर्टल और प्रक्रिया के माध्यम से इसे सुव्यवस्थित किया जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से हरियाणा मूल के प्रवासियों के लिए यह समाचार महत्वपूर्ण है। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में सुशासन और प्रशासनिक सुधारों की बारीकी से निगरानी करते हैं, क्योंकि यह उनके गृह राज्य की छवि और वहां के विकास कार्यों की गति को प्रभावित करता है। हरियाणा सरकार का यह कदम सुशासन (Good Governance) की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है, जो दर्शाता है कि राज्य प्रशासन अब भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपना रहा है और कार्यप्रणाली को आधुनिक बना रहा है।
मुख्य सचिव रस्तोगी ने सभी विभागाध्यक्षों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि किसी भी ईमानदार अधिकारी को बेवजह प्रशासनिक बाधाओं का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई जांच लंबित है, तो उसकी जानकारी भी समय पर उपलब्ध होगी, जिससे गलत नियुक्तियों या पदोन्नति पर रोक लग सकेगी।
इस नई व्यवस्था के तहत, विजिलेंस क्लियरेंस के लिए आवेदनों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर निपटाना होगा। यदि निर्धारित समय में कोई आपत्ति दर्ज नहीं की जाती है, तो उसे कुछ विशेष परिस्थितियों में 'अनापत्ति' मान लिया जाएगा, जिससे फाइलों के अटके रहने की समस्या खत्म होगी। हरियाणा सरकार का यह प्रयास डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में भी एक कदम है, जो ई-सचिवालय और अन्य डिजिटल पहलों के साथ मेल खाता है। कुल मिलाकर, यह निर्णय राज्य में एक अधिक जवाबदेह और पारदर्शी प्रशासनिक ढांचे की नींव रखने वाला साबित होगा।
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