राजनीति
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत: अमेरिकी अदालत ने यहूदी-विरोधी भेदभाव का मुकदमा खारिज किया
ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 11:37 am

एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के खिलाफ दायर उस मुकदमे को खारिज कर दिया है, जिसमें संस्थान पर परिसर में यहूदी-विरोधी भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था।
मैसाचुसेट्स के एक संघीय न्यायाधीश ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के खिलाफ दायर उस हाई-प्रोफाइल मुकदमे को खारिज कर दिया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय अपने परिसर में यहूदी-विरोधी (anti-Semitism) भावनाओं और भेदभाव को रोकने में विफल रहा है। न्यायाधीश रिचर्ड स्टर्न्स ने अपने फैसले में कहा कि वादी यह साबित करने में विफल रहे कि विश्वविद्यालय ने जानबूझकर भेदभावपूर्ण माहौल बनाया या शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की। यह फैसला अकादमिक स्वतंत्रता और परिसर प्रबंधन के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।
यह मामला पिछले वर्ष अक्टूबर में मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद हार्वर्ड परिसर में हुए विरोध प्रदर्शनों से उपजा था। मुकदमे में दावा किया गया था कि विश्वविद्यालय ने उन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जिन्होंने यहूदी छात्रों को लक्षित किया था। हालांकि, न्यायाधीश स्टर्न्स ने स्पष्ट किया कि हालांकि परिसर में तनाव की स्थिति थी, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य यह नहीं दर्शाते कि हार्वर्ड ने अपने नागरिक अधिकार दायित्वों का उल्लंघन किया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए राहत की एक श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है, जो राजनीतिक दबावों के बीच अपनी नीतियों का बचाव कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में 'प्रगतिशील विचारधारा' और कथित पक्षपात के खिलाफ एक व्यापक राजनीतिक मोर्चा खोला गया था। इस मुकदमे को अक्सर उसी राजनीतिक लहर के हिस्से के रूप में देखा गया, जिसका उद्देश्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की जवाबदेही तय करना था। न्यायाधीश का यह फैसला उन प्रयासों के लिए एक कानूनी झटके के रूप में देखा जा रहा है, जो अदालतों के माध्यम से विश्वविद्यालयों की आंतरिक नीतियों में हस्तक्षेप करना चाहते थे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों, जैसे कि सिडनी यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न में भी हाल के दिनों में गाजा संघर्ष को लेकर काफी विरोध प्रदर्शन और तनाव देखा गया है। वहां भी भारतीय और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के छात्र अक्सर कैंपस सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर चिंतित रहते हैं। हार्वर्ड का यह कानूनी परिणाम यह दर्शाता है कि भविष्य में पश्चिमी देशों में विश्वविद्यालय प्रशासन विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा के बीच कानूनी रूप से कैसे नेविगेट करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अन्य शिक्षण संस्थानों को भी एक कानूनी कवच प्रदान करेगा। यदि कोई संस्थान यह प्रदर्शित कर सकता है कि उसने विवादों को सुलझाने के लिए स्थापित प्रक्रियाओं का पालन किया है, तो उसे केवल राजनीतिक असहमति के आधार पर उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। हार्वर्ड ने इस फैसले का स्वागत करते हुए दोहराया है कि वे अपने सभी छात्रों के लिए एक सुरक्षित और समावेशी शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, चाहे उनकी धार्मिक या जातीय पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
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