राजनीति
'19 जुलाई को सरकार मानेगी हार या 20 को हम हराएंगे': जंतर-मंतर से चंद्रशेखर आज़ाद का केंद्र पर तीखा हमला
ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 05:32 am
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार को 19 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। भीम आर्मी के प्रमुख और नवनिर्वाचित सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने बुधवार को केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बड़ा बयान दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे आज़ाद ने सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आगामी 20 जुलाई को एक निर्णायक संघर्ष शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों के विशाल हुजूम को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “या तो 19 जुलाई को सरकार हार मानेगी, या फिर 20 जुलाई को हम इस तानाशाह हुकूमत को हरा देंगे।” उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। आज़ाद ने अपने संबोधन में 'तानाशाही' शब्द का बार-बार प्रयोग करते हुए यह संकेत दिया कि विपक्ष अब सड़कों पर उतरकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
सांसद बनने के बाद चंद्रशेखर आज़ाद की सक्रियता और उनके तेवर और भी कड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने मंच से कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि देश के उन तमाम शोषित और वंचित लोगों की है जिन्हें वर्तमान सत्ता तंत्र में न्याय नहीं मिल रहा है। जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ ने उनके हर वाक्य पर नारों के साथ अपनी सहमति जताई। आज़ाद ने स्पष्ट किया कि 19 जुलाई की समयसीमा सरकार के लिए एक अवसर है कि वह जनता की आवाज सुने, अन्यथा 20 जुलाई से आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी भारत की यह आंतरिक राजनीतिक हलचल काफी महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय, विशेषकर वे जो सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील हैं, चंद्रशेखर आज़ाद के उभार को बड़े गौर से देख रहे हैं। हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलियाई डायस्पोरा के भीतर भारतीय राजनीति पर चर्चाएं बढ़ी हैं और आज़ाद जैसे युवा नेतृत्व का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज़ाद का यह अल्टीमेटम संसद के आगामी सत्रों और भविष्य के चुनावों के मद्देनजर एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सरकार की ओर से फिलहाल इस अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। आने वाले दो दिन भारतीय राजनीति के लिए बेहद अहम होने वाले हैं, क्योंकि सबकी नजरें अब 19 और 20 जुलाई की तारीखों पर टिकी हैं।
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