टेक्नोलॉजी
गिरीश महाजन की AI-जनरेटेड तस्वीरों पर विवाद: मंत्री ने दर्ज कराई FIR, साइबर पुलिस ने दी कड़ी चेतावनी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:09 am

महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन की AI-निर्मित आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल होने के बाद साइबर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और जनता को इसे साझा न करने की चेतावनी दी है।
महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन एक गंभीर साइबर अपराध का शिकार हुए हैं। हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का दुरुपयोग कर बनाई गई उनकी कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। इस घटना के संज्ञान में आते ही मंत्री ने तुरंत कार्रवाई करते हुए साइबर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह मामला न केवल एक सार्वजनिक व्यक्तित्व की गरिमा से जुड़ा है, बल्कि आधुनिक तकनीक के खतरनाक इस्तेमाल की ओर भी इशारा करता है।
पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। साइबर सेल उन डिजिटल पदचिह्नों (digital footprints) की तलाश कर रही है, जिनके जरिए इन तस्वीरों को पहली बार साझा किया गया था। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इन तस्वीरों को परिष्कृत AI टूल्स का उपयोग करके बनाया गया है, ताकि वे असली नजर आ सकें। इसे 'डीपफेक' तकनीक का हिस्सा माना जा रहा है, जो वर्तमान में पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
प्रशासन ने आम जनता के लिए एक सख्त परामर्श जारी किया है। साइबर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस तरह की भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है, तो वे उसे तुरंत हटा दें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी तस्वीरों या वीडियो को आगे फॉरवर्ड करना या सोशल मीडिया समूहों में साझा करना एक दंडनीय अपराध है। जो लोग इस सामग्री को फैलाने में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य के लिए एक खतरे की घंटी हैं। न केवल भारत में, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह डिजिटल सुरक्षा के प्रति सचेत रहने का समय है। डिजिटल युग में किसी की भी पहचान के साथ छेड़छाड़ करना अब आसान हो गया है। गिरीश महाजन का यह मामला दर्शाता है कि कैसे उच्च पदों पर बैठे लोग भी सुरक्षित नहीं हैं।
फिलहाल, साइबर विशेषज्ञ उन सर्वरों और आईपी एड्रेस की मैपिंग कर रहे हैं जिनसे इन तस्वीरों को प्रसारित किया गया था। पुलिस ने अपील की है कि नागरिक किसी भी ऐसी संदिग्ध सामग्री की रिपोर्ट 'साइबर क्राइम' पोर्टल पर करें। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और AI तकनीक के नियमन पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि पुलिस ने दोषियों की पहचान लगभग सुनिश्चित कर ली है।
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