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भारत-यूरोपीय संघ संबंधों का नया अध्याय: ब्रसेल्स में एस. जयशंकर की अहम बैठकों के मायने

ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 09:31 pm
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों का नया अध्याय: ब्रसेल्स में एस. जयशंकर की अहम बैठकों के मायने

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा दी है।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया ब्रसेल्स यात्रा ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा कर दिया है। इस यात्रा के दौरान जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा सहित कई प्रमुख नेताओं के साथ गहन चर्चा की। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना था, बल्कि तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में साझा हितों की पहचान करना भी था। इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत को गति देना रही। पिछले कुछ समय से लंबित इस समझौते को अब दोनों पक्ष जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि एक संतुलित और महत्वाकांक्षी एफटीए न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच निवेश के नए रास्ते भी खोलेगा। भारतीय समुदाय और विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के व्यवसायियों के लिए यह विकास महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत के वैश्विक व्यापारिक समीकरणों में सुधार का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है। सुरक्षा के मोर्चे पर, दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह ऑस्ट्रेलिया के लिए भी विशेष महत्व का विषय है, क्योंकि भारत, ऑस्ट्रेलिया और ईयू तीनों ही एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के पक्षधर हैं। जयशंकर की इन बैठकों में समुद्री डकैती, नेविगेशन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। समुद्री सुरक्षा में यह बढ़ता सहयोग दर्शाता है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक सुरक्षा प्रदाता के रूप में उभर रहा है। तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के क्षेत्र में भी ठोस प्रगति देखी गई है। 'इंडिया-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल' (TTC) के तहत सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। वर्तमान में जब दुनिया चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और 'चाइना प्लस वन' रणनीति अपना रही है, तब भारत और ईयू का यह तालमेल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक लचीला बनाने में मदद करेगा। निष्कर्ष के तौर पर, जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा यह स्पष्ट करती है कि भारत अब यूरोपीय संघ को केवल एक व्यापारिक भागीदार के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है। आने वाले महीनों में होने वाले उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन इन चर्चाओं को ठोस समझौतों में बदलने का काम करेंगे, जो वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भारत के कद को और ऊंचा करेंगे।
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