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राष्ट्रपति मुर्मू के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में गूंजा पूरा 'वंदे मातरम'; स्वाधीनता संग्राम में गीत के योगदान को किया याद

ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 05:37 am
राष्ट्रपति मुर्मू के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में गूंजा पूरा 'वंदे मातरम'; स्वाधीनता संग्राम में गीत के योगदान को किया याद

78वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान पूरे 'वंदे मातरम' का गायन हुआ, जो राष्ट्रवाद की भावना को नई ऊंचाई दे गया।

भारत के 78वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया। इस गौरवशाली अवसर पर एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक बदलाव देखने को मिला, जब राष्ट्रपति के संबोधन के पहले और बाद में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के पूर्ण संस्करण का गायन किया गया। आमतौर पर केवल इसके पहले पद का ही उपयोग होता है, लेकिन इस बार पूरे गीत की प्रस्तुति ने देश के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की यादें ताजा कर दीं। अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस कालजयी गीत की महत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वाधीनता संग्राम के दौरान लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत था। जब देश औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब इसी गीत ने जन-जन के हृदय में देशप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित की थी। राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि कैसे स्वतंत्रता सेनानी फांसी के फंदे को चूमते समय भी 'वंदे मातरम' का उद्घोष करते थे, जो उनके अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक था। राष्ट्रपति ने अपने भाषण में भारत की विकास यात्रा और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण का मुख्य आधार बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि समावेशी विकास के माध्यम से ही हम उन महापुरुषों के सपनों को साकार कर सकते हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह क्षण विशेष महत्व रखता है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रह रहे प्रवासी भारतीय हर साल बड़े उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। ऑस्ट्रेलिया-भारत के प्रगाढ़ होते रिश्तों के बीच, राष्ट्रपति का यह संबोधन प्रवासियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय न केवल ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों का विदेशों में ध्वजवाहक भी बना हुआ है। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन के समापन में देशवासियों से एकजुट होकर राष्ट्र की सेवा करने का आह्वान किया। पूरे 'वंदे मातरम' के गायन के साथ समाप्त हुए इस सत्र ने देश के कोने-कोने में और विदेशों में बसे भारतीयों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता के पथ पर बढ़ते हुए भी भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को सर्वोपरि रखता है।
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