राजनीति
छपरा से शिकागो: बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी का प्रहार और विपक्ष की घेराबंदी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 12:41 pm
बिहार में बढ़ती सियासी तपिश के बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है, जिसमें राजद और कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।
बिहार की राजनीति इन दिनों बयानों के तीखे बाणों और व्यंग्य के दौर से गुजर रही है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सम्राट चौधरी ने विपक्ष, विशेषकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वे विरोधियों को 'छपरा से शिकागो' तक की टिकट थमा देंगे। यह बयान न केवल उनके आक्रामक तेवर को दर्शाता है, बल्कि बिहार की राजनीति में बढ़ती महत्वाकांक्षाओं और बदलती प्राथमिकताओं की ओर भी इशारा करता है।
सम्राट चौधरी के इस तंज को बिहार के विकास और वैश्विक स्तर पर राज्य की पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रवासी भारतीयों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे बिहारी समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अपनी जड़ों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे बिहार मूल के लोग अक्सर राज्य की राजनीति में आ रहे इन बदलावों को राज्य की प्रगति और शासन व्यवस्था के मापदंड के रूप में देखते हैं। सम्राट चौधरी का यह बयान एक ओर जहां विरोधियों को राजनीतिक मैदान से बाहर करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश देने की कोशिश है कि बिहार अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगा।
इसी क्रम में एक और गंभीर आरोप राजद पर लगा है, जिसमें कहा गया है कि कुछ क्षेत्रों में रेलवे स्टेशनों को पार्टी कार्यालय की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। भाजपा समर्थकों का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल की कार्यशैली अब भी राजद के डीएनए में है, जहां सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी तंत्र को निजी या दलीय हितों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर राजनीतिक प्रभाव का बढ़ना प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।
वहीं, कांग्रेस पार्टी की स्थिति पर भी तीखा कटाक्ष किया गया है। 'रायता समेटने' वाले मुहावरे का प्रयोग करते हुए यह दर्शाया गया है कि कांग्रेस बिहार में अपनी सांगठनिक कमजोरियों और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है। गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस का ग्राफ जिस तरह से गिरा है, वह आगामी चुनावों के लिए पार्टी के सामने कड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
बिहार की यह 'खरी-खरी' राजनीति न केवल स्थानीय मतदाताओं को प्रभावित करती है, बल्कि सात समंदर पार बैठे भारतीयों के लिए भी चर्चा का विषय बनी रहती है। सिडनी के हैरिस पार्क में चर्चा हो या बिहार के गांवों की चौपाल, सवाल यही है कि क्या यह बयानबाजी धरातल पर बदलाव लाएगी या केवल चुनावी मौसम का शोर बनकर रह जाएगी। सम्राट चौधरी के इन कड़े तेवरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में बिहार की सत्ता का संग्राम और भी दिलचस्प होने वाला है।
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