राजनीति
फ्लोरिडा में 'डिजिटल क्रिएटर' ने राहगीर पर किया हमला: कार्मीलो एंथोनी मामले में जूरी सदस्य होने का लगाया झूठा आरोप
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 04:30 am

फ्लोरिडा के एक व्यक्ति ने कार्मीलो एंथोनी को मिली सजा के बाद एक निर्दोष व्यक्ति पर हमला किया और उसे जूरी सदस्य बताकर जान से मारने की धमकी दी।
फ्लोरिडा में एक तथाकथित 'डिजिटल क्रिएटर' द्वारा एक निर्दोष व्यक्ति पर हमले का मामला सामने आया है। यह घटना टेक्सास में कार्मीलो एंथोनी को सुनाई गई सजा के बाद हुई है। हमलावर ने पूरी घटना को सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारित किया, जिसमें वह पीड़ित पर हमला करते हुए और उसे जान से मारने की धमकी देते हुए देखा जा सकता है। हमलावर का दावा था कि पीड़ित उस जूरी का हिस्सा था जिसने एंथोनी को दोषी ठहराया था।
उल्लेखनीय है कि कार्मीलो एंथोनी को हाल ही में एक आपराधिक मामले में 35 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के तुरंत बाद, फ्लोरिडा स्थित हमलावर ने सड़क पर चल रहे एक व्यक्ति को निशाना बनाया। वीडियो फुटेज में हमलावर को 'फ्री कार्मीलो' के नारे लगाते हुए और पीड़ित को 'तुम मरने वाले हो' जैसी धमकियां देते हुए सुना जा सकता है। हमलावर ने बिना किसी सबूत के यह आरोप लगाया कि वह व्यक्ति सजा सुनाने वाली जूरी का सदस्य था।
पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पीड़ित व्यक्ति का इस अदालती मामले या जूरी से कोई लेना-देना नहीं था। यह घटना अमेरिका में बढ़ते ध्रुवीकरण और 'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर' संस्कृति के खतरनाक पहलुओं को उजागर करती है, जहां लोग ऑनलाइन व्यूज पाने के लिए कानून को अपने हाथ में लेने से नहीं हिचकिचाते। यह मामला नस्लीय तनाव और न्यायपालिका के खिलाफ बढ़ती शत्रुता का भी प्रतीक माना जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता पैदा करती है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में जहां भारतीय प्रवासियों की बड़ी संख्या है, वहां भी घृणा अपराधों (Hate Crimes) और गलत पहचान के आधार पर हिंसा के विरुद्ध कड़े कानून हैं। यह घटना याद दिलाती है कि डिजिटल दुनिया में फैलाई जाने वाली नफरत वास्तविक जीवन में कितनी घातक हो सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि ये न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता पर भी हमला हैं। यदि जूरी सदस्यों या सामान्य नागरिकों को अदालती फैसलों के कारण निशाना बनाया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करता है। वर्तमान में पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और हमलावर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
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