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14 'गौ रक्षकों' को उम्रकैद की सजा सुनाने वाले जज को मिली धमकी, भोपाल पुलिस ने दर्ज की FIR

ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 07:31 am
14 'गौ रक्षकों' को उम्रकैद की सजा सुनाने वाले जज को मिली धमकी, भोपाल पुलिस ने दर्ज की FIR

भोपाल की एक अदालत द्वारा 14 'गौ रक्षकों' को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद संबंधित जज को धमकी देने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था और न्यायपालिका की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। भोपाल पुलिस ने एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) को धमकी देने के आरोप में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की है। यह धमकी उस समय आई है जब हाल ही में उक्त न्यायाधीश ने एक मॉब लिंचिंग मामले में 14 तथाकथित 'गौ रक्षकों' को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद की कठोर सजा सुनाई थी। यह मामला न्यायपालिका पर बढ़ते दबाव और संवेदनशील फैसलों के बाद न्यायाधीशों की सुरक्षा की चुनौतियों को रेखांकित करता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, न्यायाधीश को यह धमकी उनके आधिकारिक आवास और न्यायालय परिसर के माध्यम से मिली, जिसके बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। पुलिस ने आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दोषियों की पहचान करने के लिए तकनीकी निगरानी का सहारा लिया जा रहा है। यह विवाद उस घटना से जुड़ा है जब एक समूह ने मवेशियों को ले जा रहे एक वाहन को रोककर उसमें सवार लोगों पर बर्बरतापूर्वक हमला किया था। समूह का आरोप था कि वाहन में गायों की तस्करी की जा रही थी। इस हमले में ट्रक चालक और दो अन्य सहयोगियों को गंभीर चोटें आई थीं। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इलाज के दौरान नाजिर अहमद नामक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि दो अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद बच गए। न्यायालय ने मामले की गहन सुनवाई के बाद पाया कि यह सुनियोजित हिंसा का मामला था और कानून को हाथ में लेने वाले इन 14 व्यक्तियों को हत्या और दंगा भड़काने का दोषी माना। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि समाज में इस तरह की भीड़ तंत्र की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और न्याय का सिद्धांत सर्वोपरि है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर भारत में कानून के शासन और न्यायिक स्वतंत्रता के महत्व को दर्शाती है। प्रवासी समुदाय अक्सर भारत में सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की स्थिति पर गहरी नजर रखता है। भोपाल की इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या न्यायाधीशों को पर्याप्त सुरक्षा मिल रही है, खासकर उन मामलों में जहां सांप्रदायिक या संवेदनशील मुद्दे जुड़े होते हैं। प्रशासन ने न्यायाधीश की सुरक्षा बढ़ा दी है और यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि न्याय की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
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