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फीफा वर्ल्ड कप के पहले सोमाली रेफरी उमर अरतान को अमेरिका ने नहीं दिया वीजा, 'ट्रैवल बैन' नियमों का हवाला

ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 05:00 am
फीफा वर्ल्ड कप के पहले सोमाली रेफरी उमर अरतान को अमेरिका ने नहीं दिया वीजा, 'ट्रैवल बैन' नियमों का हवाला

फीफा विश्व कप के लिए चुने गए पहले सोमाली रेफरी उमर अरतान को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया है, जिससे खेल जगत में हड़कंप मच गया है।

खेल जगत से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सोमालिया के पहले फीफा विश्व कप रेफरी, उमर अब्दिकादिर अरतान को संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रवेश वीजा देने से इनकार कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के खेल प्रेमी और मानवाधिकार कार्यकर्ता वीजा नीतियों में निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अरतान को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान लागू किए गए कड़े यात्रा प्रतिबंधों (ट्रैवल बैन) से संबंधित नियमों के आधार पर रोका गया है। उमर अरतान ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्हें आगामी फीफा विश्व कप के लिए आधिकारिक पैनल में शामिल किया गया था, जो सोमालिया जैसे देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। हालांकि, अमेरिकी दूतावास द्वारा उनके वीजा आवेदन को खारिज किए जाने के बाद उनकी भागीदारी पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। इस फैसले ने न केवल फुटबॉल समुदाय को बल्कि अंतरराष्ट्रीय आव्रजन विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी समुदायों, विशेषकर भारतीय और अफ्रीकी मूल के लोगों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ा सोमाली समुदाय रहता है जो अक्सर खेल के माध्यम से अपनी पहचान स्थापित करता है। इसी तरह, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय भी अक्सर सख्त वीजा नियमों और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करता रहा है। अरतान का मामला यह दर्शाता है कि कैसे भू-राजनीतिक नीतियां व्यक्तिगत उपलब्धियों और वैश्विक खेल आयोजनों में बाधा डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय उन देशों के नागरिकों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अभी भी 'अस्थिर' माने जाने वाले क्षेत्रों की सूची में हैं। हालांकि जो बाइडन प्रशासन ने ट्रंप युग के कई प्रतिबंधों को शिथिल किया है, लेकिन कुछ सुरक्षा प्रोटोकॉल और 'पॉलिसी 212(f)' जैसी धाराएं आज भी अधिकारियों को वीजा अस्वीकार करने का व्यापक अधिकार देती हैं। फीफा ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं। यह मामला खेल के मैदान पर समानता के दावों पर भी सवाल उठाता है। यदि एक आधिकारिक फीफा रेफरी, जिसे विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है, को केवल उसकी राष्ट्रीयता या मूल देश के कारण अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से बाहर रखा जाता है, तो यह वैश्विक खेल भावना के विपरीत है। खेल प्रेमियों का तर्क है कि एथलीटों और अधिकारियों को राजनीतिक सीमाओं और राजनयिक विवादों से ऊपर रखा जाना चाहिए। फिलहाल, उमर अरतान और उनके समर्थकों को उम्मीद है कि राजनयिक हस्तक्षेप के माध्यम से इस बाधा को दूर किया जा सकेगा।
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