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फीफा वर्ल्ड कप: स्टेडियम की सफाई करने पर जापानी प्रशंसकों की आलोचना, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
ICN24 Newsroom 16 जून 2026, 12:01 am
फीफा विश्व कप 2026 के दौरान स्टेडियम में कचरा साफ करने के लिए जापानी प्रशंसकों को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, जबकि यह उनकी दशकों पुरानी परंपरा है।
फीफा विश्व कप 2026 के दौरान एक बार फिर जापानी फुटबॉल प्रशंसकों ने अपने व्यवहार से दुनिया का ध्यान खींचा है, लेकिन इस बार प्रशंसा के साथ-साथ उन्हें तीखी आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है। मैच समाप्त होने के बाद स्टेडियम में रुककर कचरा साफ करने की उनकी दशकों पुरानी परंपरा को सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा 'दिखावा' करार दिया जा रहा है।
जापानी प्रशंसकों का यह वीडियो वायरल होने के बाद बहस छिड़ गई है। आलोचकों का तर्क है कि यह सफाई कर्मचारियों के काम में हस्तक्षेप है और प्रशंसक केवल कैमरे के सामने अच्छा दिखने के लिए ऐसा कर रहे हैं। हालांकि, फुटबॉल जगत का एक बड़ा हिस्सा और खेल विशेषज्ञ इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि जापानी संस्कृति में 'अटारिमाए' (atarimae) की अवधारणा है, जिसका अर्थ है किसी काम को इसलिए करना क्योंकि वह सही है, न कि प्रशंसा पाने के लिए।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह बहस विशेष रूप से प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों में सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना एक साझा नागरिक जिम्मेदारी मानी जाती है। सिडनी और मेलबर्न में आयोजित होने वाले बड़े क्रिकेट मैचों के दौरान भी भारतीय प्रशंसकों को अक्सर इसी तरह की स्वच्छता मुहिम चलाते देखा गया है। जापानी प्रशंसकों पर हो रही यह टिप्पणी एक व्यापक सांस्कृतिक अंतर को दर्शाती है, जहां कुछ लोग सामुदायिक सेवा को केवल प्रचार का माध्यम मानते हैं।
इतिहास गवाह है कि जापानी प्रशंसक केवल इस विश्व कप में ही नहीं, बल्कि 1998 के फ्रांस विश्व कप और हालिया कतर विश्व कप में भी इसी तरह की अनुशासन का परिचय दे चुके हैं। उनके लिए यह 'आत्म-सम्मान' और 'दूसरे के स्थान का आदर' करने का विषय है। जापानी स्कूलों में भी बच्चों को खुद अपनी कक्षाएं साफ करना सिखाया जाता है, जिसे 'ओजी' (Oji) कहा जाता है।
खेल विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की आलोचना से जापानी प्रशंसकों के व्यवहार में बदलाव आने की संभावना कम है। खेल के मैदान पर टीम की हार हो या जीत, नीली जर्सी पहने ये प्रशंसक अपनी थैली लेकर पूरे स्टैंड को चमकाने के बाद ही स्टेडियम छोड़ते हैं। यह न केवल उनकी टीम के प्रति समर्पण है, बल्कि पूरी दुनिया को नागरिक जिम्मेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करता है। अंततः, यह विवाद खेल भावना और सांस्कृतिक मूल्यों के बीच के संतुलन पर एक नई वैश्विक चर्चा को जन्म दे रहा है।
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